भगवान भोलेनाथ की पूजा का महीना सावन आज से शुरू हो रहा है। करीब पचास साल बाद ऐसा मौका पड़ रहा है जब पवित्र सावन महीना सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही खत्म होगा। इस बार पांच सावन सोमवार पड़ेंगे। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु जुटेंगी। शिवालयों की विशेष साजसज्जा की गई है।
श्रद्धा और विश्वास का महीना सावन इस बार बेहद शुभ संयोग लेकर आया है। पंडित शांतनु पांडेय ने बताया कि करीब पचास वर्ष बाद ऐसा शुभ संयोग पड़ रहा है, जब पांच सोमवार के साथ यह पवित्र माह सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही पूर्ण होगा। रक्षाबंधन पर्व यानी श्रावण पूर्णिमा भी सोमवार को होगी। सावन को भगवान शिव महीना कहा जाता है और सोमवार भोलेनाथ का दिन होता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार को जो भक्त शिव की पूजा करता है, महादेव की उस पर पूरी कृपा रहती है। इसी कृपा को पाने के लिए श्रद्धालु सोमवार को शिवालयों में भोर होते ही जलाभिषेक को उमड़ने लगेंगे। महानगर के सभी प्राचीन शिवालयों पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर, बाहर बड़ागांव गेट के सुंदर पुरी बाग स्थित राजा बाबा का मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर, बड़ागांव गेट स्थित भूतनाथ मंदिर, ग्वालियर मार्ग स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, मढ़िया महादेव मंदिर में भोले बाबा की आराधना के लिए तैयारियां पूरी हो गई है।
सावन के सोमवार
पहला : 10 जुलाई
दूसरा : 17 जुलाई
तीसरा : 24 जुलाई
चौथा : 31 जुलाई
पांचवां : 07 अगस्त
सावन में सप्ताह के व्रत
सावन में व्रत रखने का विशेष महत्व है। सोमवार का व्रत रोटक, मंगलवार का मंगलागौरी, बुधवार का बुध व्रत, बृहस्पति का बृहस्पति व्रत, शुक्रवार का जीवंतिका व्रत, शनिवार का हनुमान तथा नरसिंह व्रत व रविवार का सूर्य व्रत कहलाता है।
शिव भक्तों का सम्मान करें
सावन में भगवान शिव के भक्तों का सम्मान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सांड अगर घर में आए तो उसकी पूजा करें। कांवड़ियों की सेवा का भी महत्व है।
शिव-पार्वती की पूजा करें
शास्त्रोें के अनुसार भगवान शिव के जलाभिषेक के बाद धतूरा, बेलपत्र, चावल, अकउवा का फूल, चंदन, धूप व इत्र चढ़ाने का महत्व है। शिव-पार्वती के पूजा करने से भक्त का दांपत्य जीवन हमेशा सुखद रहता है।
बुंदेलखंड की काशी है झांसी
झांसी को अगर बुंदेलखंड की काशी कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। महानगर में गुसाइयों द्वारा निर्मित कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर है, जहां भगवान शिव के विविध रूपों में प्रतिमाएं विराजमान है। जो संभवत: बुंदेलखंड के अन्य क्षेत्रों में नहीं हैं। मानिक चौक स्थित मठ में पंचमुखी महादेव की प्रतिमा प्रकृति के पांच तत्व पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु व आकाश को निरुपित करता है। सैंयर गेट स्थित भगवान शिव की चतुरानन मूर्ति सृष्टि के जनक ब्रह्मा के समान चारों दिशाओं की ओर देख रही है। पानी वाली धर्मशाला व दीक्षित बाग में हजारिया महादेव की मूर्ति में लघु सहस्त्रलिंग भक्तों को अभिभूत करते है। मान्यता है कि शिव पुराण के कोटि रुद्र संहिता में वर्णित भगवान शिव के नामों का पाठ इन मूर्तियों के सामने जो श्रद्धालु करता है, उस पर भोलेनाथ की असीम कृपा रहती है। ग्वालियर मार्ग स्थित श्री सिद्धेश्वर मंदिर भी पुष्य नक्षत्र में बना। झरना गेट पर बना सिंधिया परिवार का शिवालय में भी भक्तों के सभी मनोरथ पूरे होते है। महानगर के कई क्षेत्रों में गुसाइयों द्वारा निर्मित लगभग 58 छोटे-बडे़ समाधि मंदिर है, जिनमें शिव व अन्य देवी देवताओं की पौराणिक कथाएं दर्शाती हुईं प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं।
आज निकलेगी शोभायात्रा
सावन के प्रथम सोमवार को विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। श्रावण मास समारोह महासमिति की ओर से बड़ागांव गेट स्थित हनुमान मंदिर से दोपहर 3:30 बजे भगवान शिव की शोभायात्रा निकाली जाएगी। यात्रा फूटा चौपड़ा स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर में कार्यक्रम के रूप में परिवर्तित होगी। क्षत्रिय कलचुरी कलवार महासंघ व युवा शक्ति के संयुक्त तत्वावधान में एतिहासिक दुर्ग स्थित शिव मंदिर में दोपहर 12 बजे रुद्री पाठ व महाअभिषेक होगा।