झांसी। एनएचएम द्वारा मंडलीय ईको कांफ्रेंस के जरिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सीएचओ के लिए वर्चुअल सेमिनार का आयोजन हुआ। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने कहा कि मरीज की समय से स्क्रीनिंग, नियमित इलाज से देश को टीबी मुक्त बनाया जा सकता है।
उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में टीबी के मरीज अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। इससे होने वाली मौतों में भी भारत पहले स्थान पर है, जो चिंता का विषय है। मरीजों द्वारा अधूरा इलाज छोड़ने से भारत में टीबी का स्वरूप बदला है। इससे टीबी से होने वाली मौतों की मृत्युदर भी बढ़ गई है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में कार्यरत सीएचओ मरीजों के समय से इलाज के लिए ऐसे संपर्क सूत्र हैं, जिनके जरिए रोगियों में टीबी के लक्षणों की शुरुआती पहचान कराते हुए इलाज शुरू कराया जा सकता है। एनएचएम के मंडलीय परियोजना प्रबंधक आनंद चौबे ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बीमारियों के इलाज के लिए सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर पर्याप्त दवाएं, सीएचओ के जरिए परामर्श सेवाएं उपलब्ध है। हर टीबी मरीज को निक्षय पोषण योजना के तहत पांच सौ रुपये हर महीने दिए जाते हैं। संचालन गणेश तेनगुरिया और धर्मेंद्र कुमार ने किया। कार्यक्रम में मो. अतीब, धीरज सिंह चौहान, जय प्रकाश, दीक्षा प्रजापति, कल्याण राजपूत, कृष्णा जयमान, बालाराम मौजूद रहे। ब्यूरो