झांसी। मेडिकल कॉलेज के बाहर कूड़ेदान के पास फेंक दी गई बिटिया को न्याय दिलाने की अमर उजाला की मुहिम रंग लाई। उसे अभी माता-पिता भले न मिले हों नाम और पहचान मिल गई। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. नीता साहू ने सोमवार को लगातार दूसरे दिन मेडिकल कॉलेज पहुंचकर बेटी का हाल जाना और उसे ‘अपूर्वी’ नाम दिया। उन्होंने मुहिम चलाने के लिए अमर उजाला का आभार जताया। कहा कि लगातार मामला उठाकर न सिर्फ व्यवस्था को जगाया, समाज को भी जागरूक किया।
सोमवार को दूसरे दिन डॉ.साहू मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। यहां बच्ची के इलाज के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची की सर्जरी भी की गई है। पहले के मुकाबले उसके स्वास्थ्य में सुधार है। इस दौरान आयोग की सदस्य ने बच्ची को ‘अपूर्वी’ नाम दिया। उन्होंने कहा कि अब से इस बच्ची को इसी नाम से ही पहचाना जाएगा। कहा कि इलाज के सभी अभिलेखों में बच्ची का नाम अपूर्वी ही लिखा जाए।
कब क्या हुआ
- 16 दिसंबर को मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर एक के सामने ऊपर की ओर जाने वाली गली में कूड़ेदान के पास मिली थी।
- 17 दिसंबर को अमर उजाला द्वारा मामला उठाए जाने के बाद तमाम सामाजिक संगठन बच्ची का हाल जानने मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
- बच्ची की हालत बहुत गंभीर थी। एक हाथ कुत्ते ने खा लिया था। शरीर पर गहरे जख्म थे।
- ब्लड प्रेशर कम हो रहा था, हालत बिगड़ती जा रही थी। मेडिकल कॉलेज की टीम ने किया बेहतर इलाज।
- हालत सुधरने पर 22 तारीख को बच्ची का ब्लड प्रेशर सामान्य हुआ, उसने दूध पीना भी शुरू किया।
- बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान। चेयरमैन विशेष गुप्ता ने सदस्य नीता साहू को सौंपी जांच।
- 29 दिसंबर को बाल आयोग की सदस्य पहुंची शहर, पड़ताल की। पुलिस की भी टूटी नींद, मामले में दर्ज किया मुकदमा।
ताकि भविष्य में न करे कोई ऐसा गुनाह
झांसी। बाल आयोग की सदस्य ने रविवार को जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के पास मिली नवजात बच्ची के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। गुनहगारों का पता लगाकर उन्हें सजा दी जाए, ताकि आगे से कोई ऐसा कदम न उठाए। इसके अलावा उन्होंने झांसी में पड़ी महिला कल्याण विभाग की नौ एकड़ जमीन को सुरक्षित कर शिशु गृह, महिला गृह खुलवाने की बात कही।