फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अज्ञात व्यक्ति ने मोबाइल पर धमकाया, खूब की गाली गलौज

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। हादसे के बाद इंजीनियर का मोबाइल रिश्तेदारों के पास था। सुबह करीब 10 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति फोन कर गाली गलौज करने लगा। रिश्तेदार उस वक्त पुलिस के पास साथ थे। पुलिस के बात करते ही फोन कट गया। गाली गलौज सुनकर अलर्ट हुई पुलिस उस नंबर की जांच करने में जुट गई। मोबाइल नंबर प्रेमनगर क्षेत्र का बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर रिकॉर्डिंग भी वायरल हो रही है।
विज्ञापन

हादसे के बाद दोपहर से सोशल मीडिया पर दो रिकॉर्डिंग वायरल हो रही हैं। इसमें एक व्यक्ति सेक्शन इंजीनियर अशोक कुमार के मोबाइल पर फोन कर धमकाकर गाली गलौज कर रहा है। रिश्तेदारों के मुताबिक यह कॉल सूदखोरों की बताई गई है। जो अशोक के मरने के बाद भी उनको धमकाने का काम कर रहे थेे। पुलिस के बात करते ही फोन कट गया। मोबाइल नंबर प्रेमनगर क्षेत्र का ही बताया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मोबाइल नंबर को खंगालना शुरू कर दिया है। कॉल डिटेल भी पुलिस ने खंगालना शुरू कर दी है। रिश्तेदारों का कहना है कि सूदखोर ही फोन करके धमका रहे थे। उनका आरोप है कि सूदखोरों की धमकी से ही तंग आकर इंजीनियर ने आत्महत्या की है।
दोनोें बेटे हैं इंजीनियर
इंजीनियर पत्नी सुनीता के साथ अकेले रहते थे। उनके दो बेटे हैं। बड़ा पुत्र आशीष पुणे और छोटा पुत्र आकाश भोपाल में इंजीनियर है। खबर मिलते ही दोनों बेटे झांसी के लिए रवाना हो गए थे। बेटों के देरी से आने के चलते परिजनों की तरफ से कोई तहरीर नहीं दी जा सकी।
विज्ञापन

ड्यूटी की जांच करेगा रेलवे
हादसे के बाद रेलवे भी अपने स्तर से जांच करेगा। पता लगाएगा कि ड्यूटी के समय किसके साथ गए थे और किसके साथ वापस लौटे थे। इस जांच से पुलिस को काफी फायदा मिलेगा। मौत का प्रकरण भी सामने आ सकेगा। पुलिस इस मामले में रेलकर्मियों से भी जानकारी लेगी।
सूदखोरों ने फैला रखा है जाल, फंसे हैं कई रेलकर्मी
झांसी। सोमवार को सेक्शन इंजीनियर के आत्महत्या करने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई लोग अपनी जान दे चुके हैं। प्रेमनगर क्षेत्र में सूदखोरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इनमें सबसे ज्यादा लोग थाना प्रेमनगर क्षेत्र के रहने वाले सूदखोरों के जाल में फंसे हैं। लोगों के मकान व जमीन तक गिरवी हैं।
जिले में करीब 56 लाइसेंसी साहूकार हैं, लेकिन अवैध रूप से यह धंधा करने वालों की संख्या सैकड़ों में है। महानगर में सूदखोरी का धंधा बेरोकटोक चल रहा है। सूदखोरों के चंगुल में फंसने के बाद कम ही कर्जदार उनके जंजाल से बाहर आ पाते हैं। अधिकतर तो ब्याज ही भरते रह जाते हैं। सूदखोर रकम और ब्याज की वसूली के नाम पर कर्जदार को जमकर लूटते हैं।
कई बार तो ब्याज इतना ज्यादा हो जाता है कि कर्जदार का जेवर, मकान, प्लाट तक सूदखोर हथिया लेते हैं। सूदखोरों ने इन लोगों को पांच से दस प्रतिशत महीने ब्याज दर से पैसा दे रखा है। पर वसूली बीस से तीस प्रतिशत की दर से करते हैं। इनमें ज्यादातर अवैध रूप से सूदखोरी का धंधा कर रहे हैं। इनके चंगुल में फंसे कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन पर इस कदर ब्याज चढ़ गया है कि अब उसे चुकाना उनके लिए मुश्किल है।
नंबर 1
शिक्षिक ने भी की थी आत्महत्या
3 नवंबर को थाना प्रेमनगर क्षेत्र के कृष्णानगर निवासी देवदत्त मिश्रा ने भी सूदखोरों से तंग आकर ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी थी। रुपये लेने के बाद सूदखोर धमका रहे थे। उनका शव एसी लोको शेड के पास पड़ा मिला था। पुलिस ने मामला भी दर्ज किया था।
नंबर 2
जमीन व मकान रख ली गिरवी
पिछले साल मार्च में भी एक रेलकर्मी को सूदखोरों ने खूब त्रस्त किया था। रकम चुका देने के बाद भी उसे प्रताड़ित करते-करते उसका मकान व जमीन तक गिरवी रख ली थी। उसने कई पुलिस पुलिस से भी शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
शिकायत करने से कतराते हैं लोग
बेहद जरूरतमंद व्यक्ति ही सूदखोर से कर्ज लेता है, इसलिए उस पर कर्ज चुकाने का खासा दबाव रहता है। कर्जदार तो पूरी रकम चुकाना चाहता है, लेकिन ब्याज की रकम ही इतनी ज्यादा होती है कि उसकी कमाई इसे चुकाने में ही चली जाती है। सिर पर कर्ज होने की वजह से वह पुलिस प्रशासन से शिकायत करने का जोखिम उठाने में कतराता है। ऊपर से सूदखारों का रसूख भी उनको ऐसा करने से रोक देता है।
ऐसे सूदखोरों के बारे में पुलिस को जानकारी जुटाने के निर्देश थाना स्तर पर दिए गए हैं। पुलिस ऐसे मामलों में सूची भी तैयार करा रही है। जल्द ही पुलिस कार्रवाई करेगी।
विज्ञापन

विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें