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अंतर विषयक अध्ययन और शोध जरूरी: प्रो. पांडेय

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के नवाचार केंद्र में स्ट्राइड प्रोग्राम के तहत परियोजना की मेंटोरिंग और मॉनीटरिंग समिति की द्वितीय बैठक में पूर्व कुलपति और अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालयों का उत्तरदायित्व है कि वे समाज के रोल मॉडल उत्पन्न करें। आज वर्तमान संदर्भ में कोई भी एक विषय या पाठ्यक्रम द्वारा समाज के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। आज अंतर विषयक अध्ययन तथा अंतर विषयक विशेषता शोध की जरूरत है।
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प्रो. पांडेय ने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति में वैज्ञानिक शोध के साथ ही सामाजिक विज्ञान शोध को भी लेकर चलना होगा, तभी समाज का विकास हो सकता है। हम समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं। स्ट्राइड परियोजना के संदर्भ में सलाह देते हुए उन्होंने कहा की छात्रों को उनकी रुचि के विषय पर ही शोध हेतु उन्हें शोध निर्देशक उपलब्ध करवाए जाने चाहिए। कोविड-19 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना ने हमें न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ जीना सिखा दिया है। लखनऊ विश्वविद्यालय के जैव तकनीकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. यूएन द्विवेदी ने कहा कि छात्र-छात्राओं को शोध के विषय इस प्रकार दिए जाने चाहिए कि वह मात्र वैज्ञानिक शोध न रहकर समाज कार्य में आ सकें।
ऑनलाइन हिस्सा लेते हुए केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान, लखनऊ के निदेशक प्रो. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि यद्यपि द्वितीय मॉड्यूल का प्रयोगात्मक कार्य जोकि उपकरणों पर करवाया जाना था, लॉकडाउन के कारण संभव नहीं हो पाया। आशा की जाती है कि अब प्रतिभागियों द्वारा पूरा कर लिया जाएगा। बीयू कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने कहा कि प्रथम वैच के प्रतिभागियाें को ऑनलाइन कक्षाएं, वर्चुअल प्रैक्टिकल लैब के जरिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की गई। निश्चित ही वे इसका उपयोग समाज हित में करेंगे। परियोजना समन्वयक डॉ. लवकुश द्विवेदी ने प्रगति आख्या प्रस्तुत की। संयोजक प्रो. एमएम सिंह, वित्त अधिकारी एके दीक्षित, प्रो. सुनील काबिया, प्रो. सीबी सिंह, इंजी. राहुल शुक्ला मौजूद रहे।
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