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Jhansi News: विवेचनाएं डायरी में कैद... अपराधी आजाद

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। कभी चुनावी ड्यूटी तो कभी वीआईपी ड्यूटी में पुलिसकर्मियों के व्यस्त रहने से थानों में विवेचनाओं का अंबार लगता जा रहा है। विवेचनाएं पुलिसकर्मियों की डायरी में कैद हैं और अपराधी आजाद घूम रहे हैं। हालात यह हैं कि झांसी जोन में 1537 विवेचनाएं लंबित हैं। सर्वाधिक 593 विवेचनाएं झांसी जिले में अटकी हुई हैं। जबकि ललितपुर और जालौन में मिलाकर 944 विवेचनाएं समय बीत जाने के बाद भी कोर्ट में दाखिल नहीं हो सकी हैं।
थाने में किसी भी अपराध की एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की छानबीन करके सही तथ्यों का पता लगाती है। एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक मामला सही मिलने पर पुलिस कोर्ट में आरोपी के खिलाफ चार्जशीट पेश करती है, जबकि गलत होने पर अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाकर मामला खत्म कर देती है। पुलिस की इसी रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय में मामले की सुनवाई होती है, लेकिन यह अहम काम भी समय पर नहीं हो रहा है।
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जानकारों का कहना है कि सामान्य तौर पर सात साल से कम सजा वाले मामलों की विवेचना साठ दिन में पूरी करनी होती है जबकि अगर आरोप सात साल की सजा से अधिक के हैं तब 90 दिन में विवेचना पूरी करके रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी होती है। समय सीमा में विवेचना पूरी न होने पर गिरफ्तार आरोपी को जमानत का आधार मिल जाता है। आरोपी इसी आधार पर कोर्ट में जमानत की मांग भी करते हैं।
झांसी रेंज में 1537 विवेचनाएं अब तक पूरी नहीं हुईं। इनमें झांसी में 593, ललितपुर में 496 एवं जालौन में 448 मामलों की विवेचना लंबित है। अधिकांश विवेचनाएं वर्ष 2022 और 2023 की हैं। लंबित विवेचनाओं पर डीआईजी कलानिधि नैथानी ने भी गहरी नाराजगी जताते हुए तीनों जनपदों से रिपोर्ट तलब की है।
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थानावार लंबित विवेचनाओं की सूची तलब की गई है। इसमें तेजी लाने के लिए सभी जनपदों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए अभियान चलाकर लंबित विवेचनाओं को समय से पूरा कराया जाएगा।

कलानिधि नैथानी
डीआईजी
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