इस बार भी निकाय चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर तय किए गए वार्डों में होंगे। यानी इस बार भी 60 वार्ड ही रहेंगे। इनकी संख्या नहीं बढ़ाई जाएगी। हां, वार्डों में आरक्षण क्रम जरूर बदलेगा। इसकी तैयारी हो रही है।
विधानसभा चुनाव के बाद अब लोगाें की नजर नगर निकाय चुनाव पर है। 2012 में चुनाव बहुत जल्दबाजी में हुए थे। तब न्यायालय ने 2001 की जनगणना के आधार पर चुनाव कराने का आदेश दिया था। इसी बीच विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया था और चुनाव करा दिया गया। जबकि, मांग की जा रही थी कि 2011 की जनगणना के आधार पर चुनाव कराया जाए। यदि ऐसा किया जाता तो एक से डेढ़ साल चुनाव और आगे खिसक जाते, इसलिए पिछली बार 2001 की जनगणना के आधार पर ही चुनाव करा दिया गया था। तब भी 60 वार्ड ही थे। शीघ्र ही आरक्षण क्रम तय होगा और उसी के मुताबिक प्रत्याशी चुनाव लड़ सकेंगे।
प्रमुख सचिव कुमार कमलेश की ओर से जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा गया है कि चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर कराए जाएं। नई व्यवस्था के तहत छह लाख आबादी तक 60 वार्ड, 09 से 12 लाख आबादी तक 80 वार्ड, 15 लाख आबादी तक 90 वार्ड, 18 लाख आबादी तक 100 वार्ड और इससे अधिक आबादी वाले शहरों में 110 वार्ड होंगे। इस मानक के मुताबिक झांसी में 60 वार्ड ही रहेंगे।
नियम और मानक
उप्र नगर पालिका अधिनियम 1916 एवं उप्र नगर निगम अधिनियम 1989 के अनुसार नगर पंचायतों में वार्डों की संख्या कम से कम 10 और अधिकतम 24, नगर पालिका परिषदों में वार्डों की संख्या कम से कम 25 और अधिकतम 55 होगी। नगर निगम में कम से कम 60 और अधिकतम 110 होगी। ऐसे नगरीय निकाय जिनके वार्डों की संख्या 2011 की जनगणना के सापेक्ष वर्तमान वार्डों से कम हो रही हो, उनके वार्डों की संख्या यथावत रहेगी। यदि किसी निकाय में वार्डों की संख्या में एक या दो की वृद्धि हो रही हो तो उस निकाय की वार्ड संख्या जस की तस रहेगी।
इतनी है शहर की आबादी
शहर की आबादी 5,05,693 है। इसमें से पुरुष 2,65,449 और महिलाएं 2,40,244 है। इस हिसाब से यहां पर साठ वार्ड ही रहेंगे। नगर निगम की सीमा में आसपास के 16 गांव शामिल करने का प्रस्ताव कार्यकारिणी से पास हो गया था, लेकिन सदन की बैठक में नहीं पहुंचा है। इस कारण शासन को नहीं भेजा जा सका है।
12 अप्रैल तक प्रस्ताव मांगा
प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने वार्डों की संख्या का निर्धारण कर वार्ड परिसीमन का प्रस्ताव तैयार करके 12 अप्रैल तक उप्र के स्थानीय निकाय निदेशक को विशेष वाहक के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि नगरीय निकाय के निर्वाचन की कार्रवाई में किसी तरह की लापरवाही या विलंब होता है तो इसका उत्तरदायित्व जिलाधिकारी का होगा।