ड्राई फ्रूट कारोबारी के मुंशी किशन पांचाल से 24.90 लाख रुपये की डकैती के मामले में फरार चल रहे तीसरे आरक्षी नीरज राजपूत को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। दतिया निवासी नीरज को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। उसकी निशानदेही पर 12 हजार रुपये बरामद किए गए हैं।
एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने बताया कि गणेश विहार कॉलोनी निवासी मुंशी किशन पांचाल से 24.90 लाख रुपये की डकैती में तीन पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई थी। इनमें आरक्षी राघवेंद्र राजपूत (जखौरा, ललितपुर) और मनोज कुमार (मड़ावरा, ललितपुर) को सोमवार को गिरफ्तार किया जा चुका था। पूछताछ में नीरज ने बताया कि वह छुट्टी लेकर अपने गांव गया हुआ था। इसी दौरान आरक्षी राघवेंद्र ने उसे फोन कर झांसी बुलाया और कहा कि केवल आधे घंटे का काम है, किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। राघवेंद्र के कहने पर वह वर्दी पहनकर झांसी पहुंचा। यहां उसे सीधे घटनास्थल पर ले जाया गया। वारदात के बाद वह गांव लौट गया। राघवेंद्र के कहने पर उसने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया था, ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।
पुलिस के मुताबिक इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता खुशीपुरा निवासी सूर्यांश यादव, आरक्षी राघवेंद्र राजपूत, गौरव यादव, सुखबीर सिंह, सूरज सिंह और आरक्षी मनोज कुमार समेत सात आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इनके कब्जे से 24.50 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। पुलिस अब सूर्यांश यादव के मौसेरे भाई अंकित यादव की तलाश कर रही है, जो इस मामले में फरार है। इसके अलावा सट्टा कारोबार से जुड़े सतना निवासी नितिन तेजवानी और संस्कार तेजवानी की तलाश में भी दबिश दी जा रही है।
सुलगते सवाल
बरामद 24.62 लाख रुपये के अलावा बाकी रकम कहां गई?
वर्दी का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम देने की योजना किस स्तर पर बनाई गई?
फरार आरोपी अंकित यादव की गिरफ्तारी कब तक होगी?
सट्टा कारोबार से जुड़े नितिन और संस्कार तेजवानी की भूमिका कितनी अहम है?
क्या डकैती में शामिल आरोपियों की संख्या यहीं तक सीमित है या जांच में और नाम सामने आ सकते हैं?
क्या इस मामले में किसी अन्य पुलिसकर्मी या स्थानीय सहयोगी की भूमिका की भी जांच की जा रही है?