फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: लहूलुहान शवों पर थे चोट के निशान

विज्ञापन
विज्ञापन
पानी के नीचे पत्थरों से टकराने की जताई जा रही आशंका
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
मऊरानीपुर। सुखनई नदी से निकले पांचों शवों पर चोट के निशान थे। घावों से खून बह रहा था। ऐसे में उन सभी के पानी के नीचे पत्थरों से टकराने की आशंका जताई जा रही है।
आमतौर पर पानी में डूबने से शव फूल जाते हैं। शरीर के अंदर पानी भर जाता है। हालांकि, ग्राम देवरी सिंहपुरा में डूबने के कुछ देर बाद शवों को बाहर निकाल लिया गया था, जिससे उनके शरीर ज्यादा फूल नहीं पाए थे। लेकिन शवों पर चोट के निशान थे, जिनसे खून रिस रहा था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पानी के नीचे के पत्थर ऊपर से नजर नहीं आए और एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में पानी में गए लोग उन पत्थरों से टकरा गए, जिससे शरीर पर घाव उभर आए।
विज्ञापन

मऊरानीपुर थाना प्रभारी मुकेश कुमार सोलंकी ने बताया कि आशंका है कि नदी के नीचे के पत्थरों से टकराने से शरीर पर घाव हो गए थे। यह चोट भी उनके लिए जानलेवा साबित हुई। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और भी स्पष्ट हो पाएगी।
विज्ञापन

00000
बालू के खनन से सुखनई में हो गए गहरे गड्ढे
रानीपुर। कस्बा रानीपुर व देवरी सिंहपुरा के ठीक बगल से गुजरी सुखनई नदी का पौराणिक नाम सुखवंती था। यह नदी आसपास के इलाके की जीवनरेखा मानी जाती थी। लेकिन बालू के अंधाधुंध खनन ने इसका स्वरूप बिगाड़ दिया है। स्थिति यह है कि नदी की सतह पर गहरे-गहरे गड्ढे हो गए हैं, जो ऊपर से नजर नहीं आते। कहीं नदी की गहराई 10 फीट है तो कहीं 12 फीट, लेकिन अचानक इससे कई गुना गहरा गड्ढा मिल जाता है, जिसमें उलझकर लोग समा जाते हैं। एक माह पहले एक व्यक्ति नदी के चेकडैम से बह गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। जबकि इससे पहले लुहरगांव घाट पर भी एक युवक की नदी में डूबने से मौत हो गई थी। संवाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें