झांसी। केन-बेतवा लिंक परियोजना के अस्तित्व में आने के साथ ही झांसी के सबसे पुराने पारीछा बांध की जगह एक नया डैम भी बनाए जाने की तैयारी है। अभी लिंक परियोजना के जरिए सिर्फ इसकी मरम्मत का ही प्रस्ताव है। सिंचाई अभियंता पारीछा बांध की उम्र पूरी हो जाने का हवाला देते हुए नए बांध बनाने की जरूरत बता रहे हैं। महकमे की ओर से शासन को एक प्रस्ताव भी भेजा गया है।
सिंचाई विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक बेतवा नदी के बहाव का सबसे पहली बार वर्ष 1855 में सर्वे आरंभ हुआ था। इसके बाद 1857 में गदर के बाद मामला ठंडा पड़ गया। इसके कुछ वर्ष बाद ही झांसी के पारीछा गांव में सबसे पहला बांध तैयार हुआ। इसके बाद पानी की जरूरत पूरी न होने से पारीछा से करीब 112 मील ऊपर वर्ष 1901 में सुकुवां-ढुकुवां डैम तैयार हुआ। सिंचाई विभाग के अभियंताओं के मुताबिक पारीछा एवं सुकुवां-ढुकुवां डैम दोनों अपनी उम्र पूरी कर चुके। इनका निर्माण चूना एवं सुर्खी के माध्यम से कराया गया था। यह दोनों बांध भले आज तकनीकी के मामले में बेजोड़ हों लेकिन, कंक्रीट से बनी संरचनाओं की उम्र भी अधिकतम सौ वर्ष ही मानी जाती है। अभियंताओं का कहना है पानी रोकने वाले ऐसे ढांचे के कभी भी टूट जाने का खतरा रहता है।
केन-बेतवा नदी को जोड़ने के लिए तैयार हो रहे केन-बेतवा लिंक परियोजना के जरिए बरुआसागर में एक लिंक चैनल के माध्यम से केन को बेतवा से मिलाया जाएगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना की मदद से अभी मौजूदा पारीछा बांध की मरम्मत कराए जाने का प्रस्ताव है लेकिन, सिंचाई अभियंताओं का कहना है कि नई सरंचना बनाए जाने की जरूरत है। मौजूदा संरचना से करीब पांच सौ मीटर नीचे नई संरचना तैयार की जाएगी। इससे करीब सवा सौ साल पुरानी संरचना हमेशा के लिए पानी में डूब जाएगी। मुख्य अभियंता बेतवा (परियोजना) महेश्वरी प्रसाद का कहना है कि इस संबंध में शासन स्तर पर मामला विचाराधीन है। नए बांध के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूर होने पर नया बांध बनेगा। नया बांध बनने पर पुरानी संरचना पानी में डूब जाएगी।