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बुंदेलखंड के कुछ इलाकों में पानी खत्म

Mon, 11 Jan 2016 01:00 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। स्वराज अभियान के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कहा कि आगामी दो महीनों में बुंदेलखंड में जबरदस्त पानी का संकट होने वाला है। यूपी, एमपी दोनों राज्यों में आने वाले बुंदेलखंड के कुछ इलाकों में तो पानी की उपलब्धता बिल्कुल समाप्त हो गई है। गर्मी में यहां क्या हाल होगा इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। वह पत्रकार भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
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योगेंद्र ने कहा कि बुंदेलखंड अभूतपूर्व प्राकृतिक, मानव निर्मित संकट से जूझ रहा है। लगातार चौथी फसल पूर्णत: चौपट हो गई है। अब ऐसी आपदा निर्मित हो रही है, जिसके कई आयाम हैं। बुंदेलखंड में कुएं, बावड़ियां सूख रही हैं, जिससे पानी का काफी संकट हो गया है। जानवरों के लिए तो अकाल की स्थिति है।

इस दौरान उन्होंने तंज कसा कि गौ हिंसा पर बहस तो खूब होती है लेकिन बुंदेलखंड में चारों ओर जानवर मरने के लिए छोड़ दिए गए हैं। गौशाला तक में गायों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि मनुष्यों के लिए भविष्य में अकाल जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। लोगों को पौष्टिक खाना नसीब नहीं हो रहा है।
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प्रकृति की मार से फसल को भारी नुकसान हुआ है। यदि अनाज का संकट दूर नहीं किया गया तो भुखमरी आ सकती है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर बुंदेलखंड की समस्या बताएंगे और मदद की गुहार लगाएंगे।

इस दौरान समाजसेवी संजय सिंह ने बुंदेलखंड में कम्यूनिटी किचन की परिकल्पना समझाते हुए कहा कि बुंदेलखंड में यदि यह प्रभावी हो गया तो कई जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराकर एक साथ भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है। इस दिशा में स्वराज अभियान अभी सोच रहा है। महोबा में एक संगठन इसी तरह रोटी बैंक चला रहा है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के वकील डीएस शारदा, अर्चना श्रीवास्तव, अनिल कुमार मौर्य, डॉ. मो. नईम, डॉ. अवधेश, आतिफ आदि मौजूद रहे।

निगरानी को गठित होगी कमेटी
योगेंद्र ने कहा कि स्वराज अभियान बुंदेलखंड के सूखे की स्थिति पर अपनी नजर बनाए हुए है। अब जल्द ही बुंदेलखंड और जिला स्तर पर निगरानी कमेटियों का गठन किया जाएगा। जो समय-समय पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसे सरकार और समाज के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने उठाए कुछ कदम
योगेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से हुई मुलाकात का असर दिखने लगा है। सीएम ने बिजली आपूर्ति बढ़ाने, मनरेगा से बड़े पैमाने पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, खाद्य सुरक्षा अधिनियम को एक जनवरी से लागू करने की घोषणा कर दी गई, मगर जमीन पर कुछ नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने सूखे का मुआवजा दिया है। जबकि, उत्तर प्रदेश ने अभी तक सूखे का मुआवजा नहीं दिया है। वहीं, किसानों द्वारा कराया गया फसल बीमा का भुगतान दोनों में से किसी राज्य ने नहीं किया है।
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