झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की मनमानी पर अंकुश लगाने को जिला प्रशासन लगातार शिकंजा कस रहा है। चिकित्सकों की आवाजाही व उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज में दो मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर दी है। यह मजिस्ट्रेट रोजाना जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपेंगे।
मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनों डा. जितेंद्र सिंह यादव व उनके तीन सहयोगी जूनियर डाक्टरों द्वारा अमर उजाला के पत्रकार प्रशांत शर्मा को बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने चिकित्सकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसके लिए जिलाधिकारी अनुराग यादव द्वारा पहले ही यहां चप्पे - चप्पे पर सीसी टीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। अब दो मजिस्ट्रेटों की तैनाती भी कर दी गई है। मजिस्ट्रेट भगवान शरण व देवेंद्र पाल सिंह सोमवार से रोजाना मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करेंगे। वह ओपीडी में डाक्टरों की उपस्थिति व उनके व्यवहार पर नजर रखेंगे। साथ ही इमरजेंसी व वार्डों में दी जा रही चिकित्सीय सेवाओं का भी जायजा लेंगे। मजिस्ट्रेटों को चौबीस घंटे में न्यूनतम दो बार मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करना होगा। मजिस्ट्रेट इसकी प्रतिदिन की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे।
मालूम हो कि मेडिकल कॉलेज के ज्यादातर चिकित्सक ओपीडी व अस्पताल छोड़ कर निजी अस्पतालों में प्राइवेट प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं। जबकि, मेडिकल कॉलेज में मरीजों को जूनियर डाक्टरों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। ऐसे में दूर दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को इलाज के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ती है। मजबूरी में उन्हें निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। इस स्थिति पर अंकुश लगाने को उक्त कदम उठाए जा रहे हैं।