झांसी। सरकार की महत्वाकांक्षी सीएम ग्रिड योजना की टेंडर प्रक्रिया विवादों में जा घिरी है। 40 करोड़ की लागत से तीसरे चरण के कार्य कराने को लेकर आरोप है कि मनचाही फर्म को टेंडर देने की खातिर निगम अफसरों ने जानबूझकर गलत तरीके से अपात्र चार फर्मों को टेक्निकल बिड में पास कर दिया। महापौर बिहारी लाल आर्य ने भी गड़बड़ी की प्रमुख सचिव से शिकायत की है। उधर, शासन स्तर से मामले की जांच शुरू कराई गई है। निगम अफसरों की ओर से पास चार फर्म में एक को शासन ने बाहर कर दिया। आगे मामले की जांच चल रही है।
सीएम ग्रिड योजना के तहत करोड़ों रुपये से महानगर की सड़कों को संवारा जा रहा है। अभी तक इलाइट चौराहा से सीपरी बाजार, आईटीआई से गुरू हरिकिशन डिग्री कॉलेज के बीच एवं बीकेडी चौराहा से चित्रा चौराहे के बीच यह काम कराया जा चुका। अब तीसरे चरण में बीकेडी से गणेश चौराहा के बीच 40 करोड़ रुपये से सड़क संवारने का काम होना है लेकिन, इसके पहले टेंडर हथियाने के लिए ही रसूखदार फर्मों के बीच घमासान छिड़ गया। पिछले दिनों खोली गई टेक्निकल बिड से झांसी की एक फर्म को बाहर कर दिया गया।
नगर निगम की ओर से चार फर्मों का पैनल अगली मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया गया। टेक्निकल बिड में बाहर हुई फर्म ने शिकायती पत्र देते हुए आरोप लगाया कि टेक्निकल बिड में योग्य ठहराई गई फर्म को गलत तरीके से टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया। एक फर्म पर आरोप है कि कोर्ट में पर्यावरणीय मामला विचाराधीन होने का शपथ पत्र में जिक्र नहीं किया गया वहीं, दूसरी फर्म ने 200 करोड़ के कार्य की जानकारी नहीं दी। महापौर बिहारी लाल आर्य भी गड़बड़ी की शिकायत प्रमुख सचिव से कर चुके।
निविदा प्रक्रिया के पहले चरण में गलत तरीके से चार फर्मों को टेक्निकल बिड में पास किया गया। इसकी शिकायत प्रमुख सचिव से की गई है। शासन स्तर से इसकी जांच कराई जा रही है।
बिहारी लाल आर्य, महापौर