फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कम हो रही झांसी वालों की ताकत, बार-बार हो रहे बीमार

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। मेडिकल कॉलेज में हर रोज श्वांस के 50 से अधिक रोगी पहुंच रहे हैं। हार्ट के रोज 10 मरीज भर्ती हो रहे। ब्लड प्रेशर के रोगियों की संख्या तो दिन-बा-दिन बढ़ती ही जा रही है। डॉक्टरों की मानें तो झांसी वालों की ताकत कम हो रही है। पांच-छह वर्षों से लगातार बदल रहा मौसम लोगों की ताकत छीनकर उन्हें बार-बार बीमार कर रहा है। इसी वजह से श्वांस, हार्ट, स्ट्रोक और ब्लडप्रेशर के रोगी लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
विज्ञापन

यूं तो पिछले कई वर्षों से जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी दुनिया में हलचल है। लेकिन बात झांसी की करें तो यहां की हवा बीमारों की तादात बढ़ा रही है। मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर मेडिसिन डॉक्टर रामबाबू सिंह बताते है कि बुंदेलखंड में पहले से ही प्रचंड गर्मी पड़ती है। ऐसे में पांच-छह वर्षों में जिस तरह से सीजन बदल रहा है, उससे लोगों के शरीर की क्षमता प्रभावित हो रही है। गर्मी के महीने बढ़ने से लोग हीट से बचने के लिए एसी-कूलर में रहने लगे हैं। आजकल कोई शाम को गार्डेन में या घर के बाहर निकलता है। दिन-रात एसी में रहने से शरीर का नमक पसीने के रूप में बाहर नहीं निकल पाता है। साथ ही सर्दी में बहुत अधिक ठंड होने पर लोग घर के भीतर ही रह रहे हैं, लोग धूप में नहीं बैठते।
वहीं बरसात में एकदम से अधिक बारिश हो जाने से जमीन को नमी नहीं मिल पा रही है, इससे तमाम जीवाणु बराबर पनपते रहते हैं। इससे शरीर प्रभावित हो रहा है। लोग जल्दी बीमार हो रहे हैं।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि चार-पांच साल पहले की बात करें तो श्वांस, हार्ट, ब्लडप्रेशर के रोगी महीने में तकरीबन 50-60 आते थे। लेकिन अब ओपीडी में हर रोज श्वांस के तकरीबन 50 मरीज आ रहे। हार्ट संबंधी रोगों के औसतन 10 मरीज रोज भर्ती हो रहे। ब्लडप्रेशर के भी 20-30 मरीज पहुंच रहे हैं।
एसी में सूख रहा पसीना, शरीर में बढ़ रहा नमक दे रहा रोग
झांसी। डॉ. रामबाबू सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन रोग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण माना जा सकता है। झांसी में गर्मी अधिक होने लगी है। इस कारण घर हो या ऑफिस लोग दिन भर एसी या कूलर में रहने लगे हैं। ऐसे में शरीर का पसीना बाहर नहीं आ पाता है, इस कारण से शरीर में नमक की मात्रा भी बढ़ने लगती है। इस स्थिति में ब्लडप्रेशर के अलावा, शरीर के तापमान का संतुलन भी बिगड़ने लगा है। स्किन संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। लोगों को हार्ट संबंधी समस्याएं होने लगी हैं।
ये हैं बड़े कारण
-गर्मी के महीने बढ़ना, उमस और धूप में तेजी होना।
-शारीरिक भागदौड़ वाले काम होने से मशीनरी का उपयोग अधिक होना
-तड़के सुबह की ठंडक खत्म होना, देर शाम तक गर्मी व उमस बनी रहना।
-बेमौसम बारिश में ज्यादा नमी में रहने से फंगल इंफैक्शन वाली बीमारियां बढ़ना।
-मौसम में परिवर्तन के कारण मच्छर जनित बीमारियां, लू और हीट स्ट्रोक का ज्यादा असर।
-सर्दियों के दिनों में जरूरत से ज्यादा ठंड, गर्मियों की बीमारियां लगातार बनी रहना।
बदलते मौसम के कारण हरी-ताजी देसी सब्जियां हो चुकीं लापता
झांसी। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर चौरसिया बताते हैं कि मौसम में बदलाव होने से खेतों में अंधाधुंध रासायनिक खाद का उपयोग हो रहा है। बेमौसम बारिश से अब पैदावार भी प्रभावित है। इस कारण से हर सब्जी और फल हर मौसम में खरीदा जा रहा है। देसी ताजी-हरी सब्जियां बाजार से लापता हैं। अब केमिकल और कोल्ड स्टोरेज वाली सब्जियां लोगों तक पहुंच रही हैं। ये भी लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें