झांसी। नगर निगम में निर्माण कार्यों के नाम पर जमकर पैसा खर्च हुआ। टेंडर से लेकर कोटेशन पर खूब काम करा लिए गए। अब हालात ये है कि नगर निगम की तिजोरी खाली हो गई है। सात करोड़ से ज्यादा के बिल अकाउंट विभाग की अलमारियाें में रखे हैं। इन्हें भुगतान करने का पैसा तक नहीं है।
इनमें से कुछ बिल तो करीब दो महीने से भी ज्यादा पुराने हो गए हैं। अब ठेकेदार लगातार नगर निगम के अधिकारियों और अकाउंट विभाग में भुगतान करवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। शुक्रवार को भी कुछ ठेकेदार अधिकारियों से मिले और भुगतान करवाने की मांग की। बताया गया कि सात करोड़ में से करीब साढ़े चार करोड़ रुपये के कामों के बिल निर्माण विभाग के हैं। जबकि, ढाई करोड़ रुपये के बिल स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान कराए गए कार्यों के हैं। ये तो वो बिल हैं जो अकाउंट विभाग के पास पहुंचे हैं। इनका भुगतान न होते देख कई विभागों ने तो जून महीने में कराए गए कामों के बिल अपने पास ही दबाकर रख लिए हैं। ये बिल भी डेढ़ से दो करोड़ रुपये के बताए जा रहे हैं। इंतजार हो रहा है कि कब पुराने बिलों का भुगतान हो और फिर वो नए बिल अकाउंट विभाग में भेजें। वहीं, नगर आयुक्त सत्य प्रकाश का कहना है कि गृहकर आदि से होने वाली आय से लंबित बिलों का भुगतान कराया जाएगा।
12 करोड़ मिले, ज्यादातर वेतन, पेंशन पर होंगे खर्च
नगर निगम को राज्य वित्त आयोग से हाल ही में 12 करोड़ रुपये मिल गए हैं। इस पैसे से अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन, सेवानिवृत्त स्टाफ की पेंशन और देयकों का भुगतान किया जाता है। पिछले महीने चार कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं। ऐसे में करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये से ज्यादा तो वेतन, पेंशन और देयकों के भुगतान में खर्च हो जाएगा। इसके अलावा गाड़ियों के पेट्रोल-डीजल के खर्च का भुगतान होगा। उसके बाद बचे हुए करीब दो करोड़ रुपये से लंबित बिलाें का भुगतान होने की उम्मीद है।
आय के स्त्रोत बढ़ा नहीं रहे, टेंडर भी नहीं निकाला
नगर निगम का फोकस आय के स्त्रोत बढ़ाने पर नहीं है। दूसरी तरफ, करीब चार महीने पहले नगर निगम की ओर से कियॉस्क का टेंडर भी निरस्त किया जा चुका है। अब तक निगम ने दोबारा निविदा भी नहीं निकाली है। वरना, इससे भी नगर निगम को कुछ आय होनी शुरू हो जाती।