झांसी। मनरेगा के कार्यों में हो रही धांधली को रोकने तथा उसमें पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति रजिस्टर को अब ऑन लाइन करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कार्ययोजना, समयावधि, अनुमानित लागत, कार्य का क्षेत्रफल एवं प्रगति की रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। अभी तक यह सादा रजिस्टर में दर्ज किया जाता था।
मनरेगा के कार्यों की शुरुआत संपत्ति रजिस्टर से होती है। ग्राम पंचायतों द्वारा अपने यहां सादा रजिस्टर पर संपति रजिस्टर बनाया जाता है। इसमें क्षेत्र में मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों (प्रोजेक्ट), अनुमानित लागत, कार्य पूरा करने की समय सीमा दर्ज की जाती थी। हाथ सेे लिखित दस्तावेजों में आए दिन धांधली के आरोप लगते थे। इस संबंध में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और उच्चतम न्यायालय ने आदेश देते हुए कहा कि अब संपत्ति रजिस्टर ऑन लाइन बनेगा।
ऑन लाइन संपत्ति रजिस्टर में प्रतिदिन किया जाने वाला काम, अगले दिन की रूपरेखा, मजदूरों की संख्या, काम की अनुमानित लागत आदि को तीन चरणों में दर्ज कराया जाएगा। पहला चरण ‘ए’ में कार्य योजना(प्रोजेक्ट) एवं अनुमानित लागत, दूसरे चरण ‘बी’ में प्रोजेक्ट का आईडी नंबर एवं कार्य का क्षेत्रफल तथा तीसरे चरण ‘सी’ में किए गए कार्य की
प्रगति एवं शेष कार्य के खत्म होने का अनुमानित समय दर्ज किया जाएगा। यह फीडिंग प्रतिदिन होगी। इससे अधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा। ऑन लाइन कार्य होने से अब मनरेगा के कार्यों में गड़बड़ी पर अंकुश लगेगा।
‘सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से जिला पंचायत राज अधिकारी, विकास खंड अधिकारी एवं सभी ग्राम पंचायतों को अवगत करवा दिया गया है। 15 जून तक कराए गए सभी कार्यों को ऑनलाइन फीड करना है।’
विकास कुमार
उपायुक्त मनरेगा
झांसी