अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जनपद में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और अनियमित तैनाती से प्रसव पीड़िताओं का दर्द बढ़ रहा है। जिला महिला अस्पताल में मई 2023 से एनेस्थिसिया (बेहोशी) का एक भी डॉक्टर नहीं है। जबकि मोंठ सीएचसी में एक सर्जन और तीन एनेस्थेटिक की तैनाती है। महिला अस्पताल में एनेस्थेटिक को तैनात करने के लिए शासन को दो साल में 13 पत्र भेजे जा चुके हैं लेकिन हालात जस के तस हैं।
सीएमओ ने मोंठ सीएचसी से दो एनेस्थेटिक को तीन-तीन दिन के लिए यहां संबद्ध किया है। जरूरत पड़ने पर महिला अस्पताल प्रशासन को निजी एनेस्थेटिक को बुलाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार, जिला महिला अस्पताल एफआरएल (फर्स्ट रेफरल यूनिट) है। इसमें एक एनेस्थेटिक, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती अनिवार्य हैं ताकि सुरक्षित प्रसव कराया जा सके। महिला अस्पताल में जिलेभर से प्रसव कराने के लिए महिलाएं आती हैं। यहां न सिर्फ सामान्य प्रसव होते हैं बल्कि ऑपरेशन भी होते हैं।
सीएमओ ने मोंठ सीएचसी से डॉ. शिव पूजन और डॉ. केके जैन को तीन-तीन दिन के लिए महिला अस्पताल संबद्ध किया है। जरूरत के समय इनके यहां न रहने से महिला अस्पताल प्रशासन को निजी चिकित्सक डॉ. बीके दीक्षित को बुलाना पड़ता है। 16 जुलाई को चार गर्भवती महिलाएं चिंताजनक हालात में आईं। कोई भी एनेस्थेटिक न होने की वजह से निजी एनेस्थेटिक को बुलाकर ऑपरेशन कराने पड़े। जब निजी डॉक्टर व्यस्त होते हैं तो गर्भवती महिला को मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। इनकी संख्या हर माह औसतन 10-12 होती है।
महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजनारायण ने बताया कि यहां चिंताजनक हालात में आने वाली गर्भवती महिलाओं का तुरंत ऑपरेशन करना जरूरी होता है। ऐसे में जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. प्रमोद कटियार से अनुरोध कर एनेस्थेटिक की मांग की जाती है। यदि डॉक्टर खाली होते हैं, तब आकर सेवाएं देते हैं।
जिले में चिकित्सकों के 47 फीसदी पद खाली
जिले में चिकित्सकों के 47 फीसदी पद खाली हैं। सीएचसी पर विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात न होने की वजह से 70 किमी दूर से मरीज जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज उपचार कराने आते हैं। चिरगांव, बामौर, बंगरा, बड़ागांव, बबीना, मऊरानीपुर, मोंठ और गुरसराय में सीएचसी हैं। बबीना, मऊरानीपुर, मोंठ व गुरसराय सीएचसी एफआरयू की श्रेणी में हैं, जहां ऑपरेशन से प्रसव होते हैं।