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Jhansi News: ओपीडी कक्ष बदहाल, आए दिन गिरता है प्लास्टर, दीवारों पर काई की परत

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। मेडिकल कॉलेज के कई ओपीडी कक्ष बदहाल हैं। आए दिन छत से प्लास्टर गिरता है। सीलन से दीवारों पर काई की मोटी परतें चढ़ी हैं। यह हालात तब है, जब कॉलेज प्रशासन हर साल बिल्डिंगों की मरम्मत के लिए लाखों रुपये खर्च करता है।



मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में उपचार के लिए रोजाना सैकड़ों रोगी आते हैं। सीनियर डॉक्टरों के साथ सीनियर रेजीडेंट और जूनियर डॉक्टर (जेआर) उनका उपचार करते हैं। वैसे तो एक-दो ओपीडी कक्षों को छोड़कर अधिकांश की व्यवस्थाएं बदहाल हैं। सर्जरी की ओपीडी की छत इतनी ज्यादा खराब है कि आए दिन छत से प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है, जिसकी वजह से लेंटर की सरिया तक निकल आई है। यही हाल सर्जरी के सीनियर डॉक्टरों के कक्ष की छत और दीवार का है। इनके कक्ष की दीवार पर सीलन की वजह से काई की मोटी परत जम गई है। नेत्र रोग विभाग की ओपीडी कक्ष और वरिष्ठ डॉक्टर का कक्ष भी बदहाल है। नेत्र रोग की ओपीडी में डॉक्टरों के शौचालय की छत का प्लास्टर टूटकर गिर चुका है।
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सीनियर डॉक्टरों का कहना है कि भवन की स्थिति से अधिकारी वाकिफ हैं। उनसे यहां के भवनों की स्थिति ठीक करने के लिए कहा भी जा चुका है लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।



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ओपीडी की बिल्डिंग 1968 की है। समय-समय पर मरम्मत कराई जाती है। कोविड के दौरान ही रंगाई-पुताई कराई थी। यदि ओपीडी में छत से प्लास्टर टूटकर गिर रहा हैं या दीवार खराब हैं तो विभागाध्यक्ष लिखकर दें। कॉलेज की प्राथमिकता ओपीडी से पहले इमरजेंसी और हॉस्पिटल है। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बिल्डिंग प्रभारी मेडिकल कॉलेज
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ओपीडी कक्षों की जर्जर छतों और दीवारों को जल्द सही कराया जाएगा। पता कराया जाएगा कि किस-किस ओपीडी में दिक्कत है। - डॉ. मयंक सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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