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शहर में कूड़ा उठ नहीं रहा, हर महीने डीजल में लाखों का खेल

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नगर निगम के वाहन पॉलीटेक्निक कॉलेज के परिसर में घंटो खडे़ रहते हैं।
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झांसी। महानगर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। जबकि साफ सफाई के लिए दौड़ रहे नगर निगम के वाहनों में लाखों का डीजल फुंक रहा है। सूत्रों के अनुसार हर महीने पंद्रह लाख से अधिक की डीजल चोरी का खेल चल रहा है। जिसे रोकने में जिम्मेदार फेल नजर आ रहे हैं।
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नगर निगम की कर्मशाला में करीब 137 वाहन हैं। इनमें से अधिकांश वाहन रोज सफाई कार्य और कूड़ा उठाने के लिए वार्डों में पहुंचते हैं। अधिकतर के माइलो मीटर खराब हैं। इनको रोज करीब 30 से 50 लीटर तक की पर्ची दी जाती है। सूत्र बताते हैं कि वाहन चालक तय पेट्रोल पंप से पर्ची में से कम डीजल डलवाते हैं और बाकी का उसे भुगतान हो जाता है।
महानगर में नगर निगम के तमाम वाहन चालक डीजल की चोरी करने के चलते वाहन जहां-तहां खड़ा कर समय व्यतीत करते हैं। ग्वालियर रोड स्थित पॉलिटेकिभनक रोड, सीपरी बाजार समेत तमाम इलाकों में सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक वाहन खड़े कर चालक आराम फरमाते हैं। समय पूरा होने पर वाहन चालक कर्मशाला पहुंचकर कूड़ा डंप करते हैं और उसके समय को लॉगबुक में दर्ज कर दिया जाता है। सूत्रोें की मानें तो हर महीने डीजल के नाम पर ही करीब पंद्रह लाख रुपये का खेल होता है।
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इसे लेकर पहले भी पार्षदों ने रोष जताया है, लेकिन जिम्मेदार इसे लेकर कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। पार्षद किशोरी रायकवार का कहना है कि नगर निगम की कर्मशाला में डीजल के नाम पर हो रहे खेल की जांच होनी चाहिए। वाहन चालक मनमानी करते हैं। अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते। पार्षद विमल किशोर का कहना है कि पहले जो भी वाहन वार्ड में जाता था, उसे काम पूरा करने के बाद पार्षद और सफाई हवलदार से हस्ताक्षर कराने होते थे, लेकिन अब नगर निगम अधिकारियों ने इसे बंद कर दिया है। इसके चलते मनमानी हो रही है। निगम हर साल 5.38 करोड़ रुपये महज डीजल और पेट्रोल पर व्यय करता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो महीने में करीब 44 लाख रुपये का व्यय होता है। वहीं वाहनों की रिपेयरिंग पर 59 लाख रुपये खर्च होते हैं।
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गाड़ियों में नहीं लगे जीपीएस
नगर निगम की कार्यशाला से दौड़ने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम भी नहीं है। ऐसे में वाहन चालक मनमानी करते हैं। नगर निगम ने इसे लेकर पहल भी नहीं की। नगर निगम वाहनों की रिपेयरिंग के नाम पर बड़ा खर्च करता है। वाहनों के जीपीएस की कीमत दो हजार रुपये तक होती है। जबकि माइलो मीटर की कीमत भी इतनी ही है। अगर वाहनों में जीपीएस और माइलो मीटर लगा दिए जाएं, तो कुछ हद तक डीजल के खेल पर लगाम लग सकती है।
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इनका कहना है
डीजल चोरी होने की कोई जानकारी नहीं है। वाहन चालक ऐसा कर रहे हैं, तो इसे दिखवाता हूं। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त
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