झांसी। कोरोना काल में रेलवे को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इससे उबरने के लिए रेलवे अपने खर्च में कटौती कर रहा है। बोर्ड के निर्देश पर 19 प्रकार के मदों में 20 प्रतिशत तक की कटौती की गई है। यहां तक कि कार्यालय खर्च भी घटाया गया है।
कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के दरम्यान रेलवे को ट्रेनों का संचालन भी बंद करना पड़ गया था। इस दौरान यात्री ट्रेनों से होने वाली आमदनी शून्य पर पहुंच गई थी। रेलवे को मालगाड़ियों का ही सहारा रह गया था। जबकि, इस दरम्यान रेलवे को कर्मचारियों के वेतन पर सामान्य दिनों की तरह ही खर्च करना पड़ा। ट्रेनों का संचालन शुरू होने के लंबे समय बाद भी रेलवे को यात्री ट्रेनों से मिलने वाला राजस्व सामान्य स्थिति में नहीं पहुंच पाया था। इस घाटे से उबरने के लिए रेलवे द्वारा अपने खर्च में कटौती की जा रही है। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के जोनल निदेशक (वित्त) ने निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने 19 बिंदुओं पर 20 प्रतिशत तक की कटौती का सुझाव दिया, जिस पर रेलवे की ओर से अमल किया जा रहा है। रेलवे के विभिन्न कार्यालयों का खर्च घटाया गया है। साथ ही ओवरटाइम व यात्रा भत्तों पर भी लगाम कसी गई है।
इन खर्चों में की गई कटौती
झांसी। रेलवे द्वारा ओवरटाइम भत्ता, रिवार्ड, घरेलू यात्रा भत्ता, विदेश यात्रा भत्ता, कार्यालय खर्च, रेंट, रेट्स एंड कर, रॉयल्टी, पब्लिकेशन, अन्य प्रबंधन खर्च, सप्लाई एंड मेटेरियल, कॉस्ट ऑफ राशन, पेट्रोल एंड ऑयल लुब्रीकेंट, क्लॉथिंग एंड टेंटेज, एडवरटाइजमेंट एंड पब्लिसिटी, माइनर वर्क मेंटनेंस, सर्विस चार्ज, सामान्य सहायता अनुदान, कांट्रीब्यूशन और अन्य खर्चों में कटौती की जा रही है।
रोकना पड़ गया था फैक्ट्री का निर्माण
झांसी। रेलवे द्वारा झांसी में रेल कोच नवीनीकरण फैक्ट्री का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन, कोरोना काल में हुए नुकसान के बाद रेलवे को इसका काम रोकना पड़ गया था। हालांकि, रेल विकास निगम ने इसका निर्माण अपने फंड से जारी रखा था। लेकिन, बाद में रेलवे ने भी इसके लिए बजट जारी कर दिया था।
रेलवे में किसी तरह की फिजूलखर्ची नहीं की जा रही है। व्यय कम कर आय बढ़ाने और बेहतर यात्री सुविधाएं देने पर जोर दिया जा रहा है। कोरोना काल में हुए नुकसान के बाद भी लगातार रेलवे की ओर से यात्री सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
- मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी