झांसी। नगर निगम के लेखाधिकारी उल्लास वर्मा का तबादला हो गया। उनकी पारी महज पांच माह ही चल सकी। उनके स्थान पर यहां पहले करीब सात साल गुजार चुके राजकिशोर को फिर से भेज दिया गया हालांकि आला अफसर से चल रहे टकराव के चलते उल्लास वर्मा का हटाया जाना तय माना जा रहा था। लेखाधिकारी के तबादले के बाद इस पद पर राजकिशोर की वापसी से निगम में चर्चा शुरू हो गईं।
नगर निगम की तिजोरी की चाबी लेखाधिकारी के पास रहती है। इस लिहाज से इसे काफी अहम पद माना जाता है। फरवरी माह में यहां आगरा निगम से उल्लास वर्मा को भेजा गया। लेखाधिकारी ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में अनियमित भुगतान, बिना टेंडर एवं कुटेशन के लाखों रुपये से कार्य कराने, वाहनों की लॉगबुक एवं डीजल-पेट्रोल के नाम पर हर महीने लाखों रुपये की गड़बड़ियां मिलने पर सभी भुगतान रोक दिए। इससे निगम के अधिकांश काम भी ठप पड़ गए। इसको लेकर आला अफसर एवं लेखाधिकारी के बीच छत्तीस का आकड़ा हो गया। विवाद के चलते जिलाधिकारी को बीच में आना पड़ा। जिलाधिकारी की विशेष अनुमति से बीएसए दफ्तर में तैनात वित्त एवं लेखाधिकारी राममुरारी लाल को नगर निगम में तैनात कर दिया गया। इसकी शिकायत लेखाधिकारी उल्लास वर्मा ने मंडलायुक्त से कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच चल रही रार सतह पर आ गई। मंडलायुक्त से शिकायत करने के बाद से ही उल्लास वर्मा की विदाई की अटकले लगने लगीं। शुक्रवार को जारी तबादला सूची में उल्लास वर्मा को झांसी से इसी पद पर नए नवेले नगर निगम शाहजहांपुर भेज दिया गया जबकि उनकी जगह आगरा से राजकिशोर को फिर से वापस भेज दिया गया। राजकिशोर इसके पहले झांसी में जुलाई 2014 से फरवरी 2021 तक तैनात रहे हैं।