यूनेस्को ने रविवार को वर्ल्ड हैरीटेज फन डे मनाया। मेक हैरीटेज फन पर केंद्रित मेक इट संडे लाइक नो अदर कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने यूनेस्को प्रतिनिधियों और इतिहासकारों के साथ नगर के एतिहासिक दुर्ग को गहराई से जाना। इस मौके पर विद्यार्थियों ने ट्रेजर हंट जैसी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और एतिहासिक स्थलों से जुड़ी पहेलियों के जवाब दिए।
सेंट फ्रांसिस इंटर कालेज, लक्ष्मी व्यायाम मंदिर इंटर कालेज के लगभग 25 विद्यार्थियों के दल ने दुर्ग में भ्रमण किया। जिन्हें क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे, इतिहासकार डा. सुधा गुप्ता ने गणेश मंदिर, शिव मंदिर, दरबार हॉल, काल कोठरी, पंचमहल पर जानकारी देते हुए किले के पुराने और अंग्रेजों द्वारा किए निर्माण के बारे में बताया। दरबार हाल को लेकर विद्यार्थियों में रोचकता नजर आयी, जिसे अंग्रेजों ने पानी की टंकी में तब्दील कर दिया था।
इस मौके पर यूनेस्को क ी जिला कोआर्डिनेटर सौम्या जैन, अदिति टडैया ने विद्यार्थियों एवं पर्यटकों को बताया कि यूनेस्को पुरा स्थलों के संरक्षण की दिशा में कार्य करती है। अगर विद्यार्थी यूनेस्को में इंटर्न शिप कर पुरा धरोहरों और उसके संरक्षण पर लेख लिखता है, तो यूनेस्को प्रमाण पत्र देती है, जो उसके कैरियर में सहायक है। भ्रमण अवसर विद्यार्थियों ने ट्रैंजर हंट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने न वहां पर पंच बैठते है, न महल रहा, वीर सिंह जी ने बनवाया जैसी पहेलियों के जवाब दिए। विजेता ग्रुपों को यूनेस्को द्वारा उपहार प्रदान किए गए। इस अवसर पर डा. सुनील तिवारी, सुनील अग्रवाल, तान्या अग्रवाल, प्रथम अग्रवाल, मोहन नेपाली, अनिल रिछारिया, सिद्धार्थ, आशीष मित्तल, अंकित यादव आदि मौजूद रहे।
18 दिसंबर को मनता है वर्ल्ड हैरीटेज फन डे
यूनेस्को हर साल 18 दिसंबर को वर्ल्ड हैरीटेज फन डे मनाता है। जिसे मनाने का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित रहता है। इस अवधि में हैरीटेज स्थलों का महत्व एवं उनका संरक्षण पर यूनेस्को द्वारा विद्यार्थियों व युवाओं को मौज मस्ती के साथ बताया जाता है।
वर्ल्ड हैरीटेज फन डे को नहीं लिया गंभीरता से
कोआर्डिनेटर सौम्या जैन व अदिति टडैया के मुताबिक वर्ल्ड हैरीटेज फन डे के मेक हैरीटेज फन कार्यक्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और केंद्रीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए उन्होंने इन विद्यालयों एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रशासन से संपर्क किया था, लेकिन वहां के विद्यार्थी नहीं आए।
ये धरोहर हैं खास
महानगर में पुरा धरोहरों की श्रृंखला काफी बड़ी है, जिनमें से कईयों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है। इनमें एतिहासिक दुर्ग, रानी महल, झोकन बाग में सिमेट्री मेमोरी, रघुनाथ राव का महल, राजा गंगाधर राव की समाधि, लक्ष्मी मंदिर है। महाराष्ट्रीय समाज द्वारा गणेश मंदिर का संरक्षण है। जबकि 17 वीं शताब्दी में गुसाईंयों द्वारा बनवाए समाधि मंदिरों को कोई संरक्षण नहीं है। इन मंदिरों में मूर्तिकला अद्भूत है।