कोर्ट को गुमराह करने के आरोपी पिता-पुत्र को नहीं मिली राहत
- अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। कार में छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में फर्जी मार्कशीट के जरिए नाबालिग दर्शाकर कम सज़ा पाने के मामले में आरोपी पिता-पुत्र को राहत नहीं मिल सकी। उनका अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट धीरेंद्र कुमार तृतीय के न्यायालय ने निरस्त कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 14 जुलाई 2022 को थाना नवाबाद में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि पांच नवंबर 2006 को चलती गाड़ी में कपिल राजपूत व सह अभियुक्त आदि ने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी अश्लील वीडियो बनाई थी, जो बाद में वायरल हुई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अभियुक्तगणों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। उक्त मामले में कपिल राजपूत को सजा से बचाने के लिए उसके पिता ने कपिल की जन्मतिथि गलत दर्शाते हुए न्यायालय को गुमराह करके धोखा दिया। साथ ही कपिल राजपूत के बाल अपचारी होने का न्यायालय से गलत आदेश पारित करा लिया। उक्त मामले में अभियुक्त पिता - पुत्र द्वारा कारित अपराध गम्भीर प्रकृति का मानते हुए न्यायालय द्वारा अभियुक्तगण कपिल राजपूत व धर्मेंद्र उर्फ पप्पू राजपूत का द्वितीय अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया।