फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: दुश्मन ऊंचाई पर था, लेकिन हमारा हौसला उससे भी बुलंद था

Sun, 26 Jul 2026 02:39 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर कारगिल युद्ध में शामिल रहे झांसी के पूर्व सैनिकों ने 27 वर्ष पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि दुश्मन ऊंची चोटियों पर कब्जा जमाए बैठा था और वहां से लगातार गोलाबारी कर रहा था लेकिन भारतीय सैनिकों का हौसला उससे कहीं अधिक ऊंचा था। विषम परिस्थितियों और कठिन भौगोलिक हालात के बावजूद सेना ने अदम्य साहस का परिचय दिया और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। टाइगर हिल पर दोबारा तिरंगा फहराने का क्षण याद कर आज भी उनकी आंखें नम हो जाती हैं और शरीर रोमांचित हो उठता है।
विज्ञापन

अमर उजाला ने कारगिल युद्ध में शामिल रहे कई पूर्व सैनिकों से बातचीत की। उनका कहना था कि ''कारगिल'' शब्द सुनते ही युद्ध के दिन आंखों के सामने ताजा हो जाते हैं।
सारंध्रा नगर कॉलोनी निवासी पूर्व सैनिक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती ऊंचाई पर बैठे दुश्मन से मुकाबला करना था। भौगोलिक स्थिति का लाभ दुश्मन को मिल रहा था, लेकिन भारतीय जवानों ने अदम्य साहस के साथ हर मोर्चे पर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि उस समय उनकी तैनाती मेरठ में थी। कमांडिंग ऑफिसर का आदेश मिलते ही महज आठ घंटे के भीतर पूरी यूनिट रवाना हो गई। सोनमर्ग होते हुए जोजिला पहुंचे, जहां दुश्मन की गोलाबारी जारी थी। आधी रात को जवाबी कार्रवाई करते हुए उनकी यूनिट द्रास सेक्टर पहुंची। ऊंचाई से हो रही फायरिंग के कारण जवाब देना बेहद कठिन था, फिर भी उनकी यूनिट ने 35 दुश्मनों को मार गिराया। 9 जुलाई को टाइगर हिल की निर्णायक लड़ाई में उनके कैप्टन आर. जेरी प्रेमराज शहीद हो गए। इसके बाद भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया। उन्होंने बताया कि तिरंगा लहराता देख कई सैनिकों की आंखें छलक उठी थीं।
विज्ञापन


सेवानिवृत्त सूबेदार पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि उस समय उनकी तैनाती 8 माउंटेन डिवीजन में थी। कारगिल संघर्ष शुरू होते ही सेना की सभी शाखाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया था और प्रत्येक जवान अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रहा था।
सेवानिवृत्त सार्जेंट कौशल किशोर तिवारी ने बताया कि वह जोधपुर स्थित 10 स्क्वाड्रन में तैनात थे। युद्ध शुरू होते ही उनके पूरे स्क्वाड्रन को अग्रिम मोर्चे पर भेज दिया गया।
पूर्व सैनिक बालकदास प्रजापति ने बताया कि उनकी तैनाती बटालिक सेक्टर में थी। दुश्मन ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ऊंची चोटियों पर कब्जा कर रखा था और वहीं से गोलाबारी कर रहा था लेकिन भारतीय सेना का मनोबल कभी कमजोर नहीं पड़ा।
पूर्व फ्लाइंग ऑफिसर एसएस प्रसाद ने कहा कि कारगिल युद्ध में सेना की हर यूनिट ने अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया। सभी के समन्वित प्रयासों और वीरता के कारण ही भारत ने निर्णायक विजय हासिल की।


बुंदेलखंड के चार वीरों ने दी थी सर्वोच्च बलिदान
कारगिल युद्ध में बुंदेलखंड के चार जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। इनमें महोबा के पचपेहरा गांव निवासी नायक जगदीश प्रसाद यादव (2 जुलाई 1999), महोबा के गंज गांव निवासी नायक बलविंदर सिंह (26 जून 1999), जालौन के चिल्ली गांव निवासी क्राफ्ट्समैन योगेंद्र पाल सिंह (7 अगस्त 1999) और बिलोहन गांव निवासी हवलदार सरमन सिंह सेंगर (28 जून 1999) शामिल हैं। इन चारों वीरों के नाम झांसी के कारगिल पार्क स्थित शहीद स्मारक पर अंकित हैं।


आज कारगिल पार्क में दी जाएगी शहीदों को श्रद्धांजलि
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद की ओर से कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार सुबह आठ बजे सीपरी बाजार स्थित श्रीराम मंदिर परिसर के कारगिल शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। परिषद के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व फ्लाइंग ऑफिसर एसएस प्रसाद ने बताया कि कार्यक्रम में पूर्व सैनिक, शहीद परिवारों के सदस्य और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें