अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। स्मार्ट टीबी सेंटर, स्मार्ट लेबर रूम और 500 बेड के अस्पताल के चालू होने के इंतजार की इंतहा हो गई है। कई माह पहले करोड़ों रुपये में बनकर तैयार तीनों बिल्डिंगें हैंडओवर का इंतजार कर रही हैं। इन्हें हैंडओवर करने की तारीख पर तारीख तय हो रही हैं। वहीं, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जब तक बिल्डिंग हैंडओवर नहीं होंगी, तब तक उपकरण लगाकर मरीजों को भर्ती नहीं कर सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज में बनी 500 बेड के अस्पताल की बिल्डिंग अभी तक शुरू नहीं हुई है। अधिकारी कभी जनवरी, फरवरी तो कभी अप्रैल-मई में इसके शुरू होने का दावा करते हैं। हकीकत यह है कि अभी तक बिल्डिंग हैंडओवर करने की स्थिति में नहीं है। जनवरी में मंडलायुक्त ने सात फरवरी तक काम पूरा करके बिल्डिंग हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए थे मगर काम पूरा नहीं हो सका। अब मंडलायुक्त ने कार्यदायी संस्थाओं को 15 मई तक बिल्डिंग हैंडओवर करने के निर्देश दिए हैं। यदि मंडलायुक्त के आदेश पर 15 मई तक बिल्डिंग हैंडओवर हो जाती है, तब इसके जून-जुलाई में शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है।
वहीं, जेडीए ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों रुपये में स्मार्ट टीबी सेंटर बनाया है। इसमें क्षय रोग के गंभीर रोगियों को भर्ती कर उपचार किया जाना है। कार्यदायी संस्था का दावा है कि बिल्डिंग तैयार हो गई है मगर हकीकत इसके एकदम इतर है। बिल्डिंग के आसपास बालू के ढेर लगे हुए हैं। अभी कई कमरों के अंदर गेट तक नहीं लग सके हैं। ऐसे हालात में बिल्डिंग हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू होना संभव नहीं है।
स्मार्ट लेबर रूम भी बनाया गया है। इसमें ऑपरेशन से पूर्व महिलाओं को भर्ती किया जाएगा। इसमें मेडिकल कॉलेज की ओर से आईवीएफ सेंटर शुरू करने की भी योजना थी, जो अधर में है। स्मार्ट लेबर रूम अभी तक कार्यदायी संस्था ने तैयार नहीं किया है, जिस वजह से हैंडओवर नहीं किया जा रहा है। वहीं, पिछले दिनों जेडीए उपाध्यक्ष आलोक यादव ने कार्यदायी संस्था को एक सप्ताह में काम पूरा कर दोनों बिल्डिंग हैंडओवर करने के आदेश दिए थे मगर परिणाम शून्य ही है।
वर्जन
1. मेडिकल कॉलेज प्रशासन व कार्यदायी संस्था के बीच में वार्ता हो गई थी। फायर एनओसी की वजह से देरी हो रही है। उम्मीद है कि तीन-चार दिन में मिल जाएगी। इसके बाद स्मार्ट टीबी सेंटर और स्मार्ट लेबर रूम को हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी करवा दी जाएगी। - आलोक यादव, जेडीए उपाध्यक्ष
स्मार्ट लेबर रूम और स्मार्ट टीबी सेंटर हो या फिर 500 बेड का अस्पताल, जब तक बिल्डिंग हैंडओवर नहीं होंगी, रोगियों का उपचार नहीं किया जा सकता है। - डॉ. मयंक सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज