झांसी। डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली दवाइयों के भारी कमीशन पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने जन औषधि स्टोर खोलने पर जोर दिया है। इन जन औषधि केंद्रों पर कई गुना कम मूल्यों पर दवाइयां मिलेंगी।
गौरतलब है कि दिनों दिन बढ़ रही दवा कंपनियों की संख्या ने दवा बाजार को गर्म कर दिया है। कंपनियों के बीच अपनी दवाएं बेचने की होड़ है, इसके लिए वह डॉक्टरों को लुभाती हैं। मनमाना कमीशन मिलने पर डॉक्टरों द्वारा कंपनियों की दवाएं लिखी जाती हैं। इस कमीशन के खेल में कमर आम जनता की टूटती है।
इसे देखते हुए मोदी सरकार ने पूर्व में संचालित जन औषधि योजना का विस्तार करते हुए जन औषधि स्टोर खोलने पर जोर दिया है। जन औषधि स्टोरों में जीवन रक्षक दवाइयां 40-50 फीसदी तक छूट के साथ उपलब्ध होंगी। ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि इन केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयां डायरेक्ट कंपनी से सप्लाई होंगी।
इन पर कोई टैक्स भी नहीं लगेगा। यह स्टोर भी मेडिकल स्टोर ही होगा। जो भी यह केंद्र खोलना चाहेगा, उसे रिटेल के लाइसेंस को ऑनलाइन आवेदन करना पड़ेगा। डीआई अतुल उपाध्याय के मुताबिक लाइसेंस को लेकर सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जो भी जन औषधि केंद्रों के लिए आवेदन करता है, उसे प्रमुखता दी जाए।
सभी का सॉल्ट होता एक
मर्ज के हिसाब से दवाइयों का सॉल्ट (रॉ मेटेरियल) तैयार किया जाता है। जेनेरिक दवाइयों में इस्तेमाल में लाया जाने वाला सॉल्ट लगभग एक जैसा ही होता है। इसके बाद कंपनियों द्वारा उस सॉल्ट की खरीद कर थोड़ी तब्दीली के बाद अपनी मुहर लगा दी जाती है। उसके बाद सॉल्ट की कीमत में भारी बढ़ोतरी हो जाती है। फिर एक्साइज ड्यूटी आदि लग जाने के बाद वह दवा कई गुना महंगी हो जाती है।
झांसी में 70-80 कंपनियों के स्टॉपेज
झांसी में करीब 70-80 दवा कंपनियों के स्टॉपेज हैं। यह सभी बड़ी कंपनियां हैं, जो बड़ी मात्रा में विभिन्न मर्जों की दवाएं बेच रही हैं। इन कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा डॉक्टरों, मेडिकल स्टोरों से सेटिंग कर महंगी दवाइयां बेची जा रही हैं।