auto registration, jhansi news
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ऑटो चालकों की मनमानी के आगे प्रशासन नतमस्तक है। जिला प्रशासन, नगर निगम, आरटीओ और पुलिस इनकी बेढंगी चाल की जानकारी है, लेकिन संबंधित जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ बयानबाजी ही कर रहे हैं। अभी तक कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया। आटो वाले नियम और कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं पर किसी को चिंता नहीं है। इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। कोई विकल्प नहीं है, इसलिए इन आटो में यात्रा करना मजबूरी है।
नगर निगम ने ऑटो के लिए स्टैंड बनाने और स्टापेज तय करने के लिए इनका रजिस्ट्रेशन शुरू करवाया था, लेकिन ज्यादातर ने रुचि नहीं दिखाई। तीन महीने में मात्र 1200 ऑटो के ही रजिस्ट्रेशन हुए। नगर निगम ने एसएसपी को रजिस्ट्रेशन न करवाने वाले आटो पर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा, लेकिन इस पर गौर नहीं किया गया। दरअसल आटो वाले नियम और कानून में बंधना ही नहीं चाहते। शायद यही कारण है कि वे रजिस्ट्रेशन करवाने से कतरा रहे हैं। जहां मन होता है खड़े होकर सवारियां भरने लगते हैं। कहीं भी रास्ता रोककर जाम लगा देते हैं। तेज आवाज में गाने बजाना, मनमाना किराया वसूलना और विरोध पर लोगों से झगड़ना आम बात हो गई है।
पुलिस करे कार्रवाई
नगर निगम ने एसएसपी को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। अब कानून का डंडा तो पुलिस को ही चलना है। हम पुलिस को मदद करने के लिए तैयार हैं।
रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त
फिर चलेगा अभियान
कार्रवाई होती रहती है। आटो वाले जब फिटनेस के लिए सीट और म्यूजिक सिस्टम हटा कर आते हैं। अब फिर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा।
आरके सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
कागजों की कमी होने पर ऑटो पर कार्रवाई होती रहती है। नगर निगम में रजिस्ट्रेशन की क्या प्रक्रिया अपनाई गई है? इसको समझेंगे और इसके बाद बेतरतीब आटो वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रणनीति बनाएंगे।
अखिलेश चौरसिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक