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कोरोना काल में और बढ़ गई माइक्रोबयोलॉजिस्ट की मांग

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झांसी। विज्ञान के क्षेत्र में लगातार विकास होने की वजह से माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में नौकरी के कई अवसर खुले हैं। कोरोना काल में तो माइक्रोबायोलॉजिस्ट की मांग और बढ़ गई है। इस फील्ड में सूक्ष्म जीवों का अध्ययन किया जाता है। इन सूक्ष्म जीवों को हम सिर्फ माइक्रोस्कोप के जरिये ही देख सकते हैं। बायोलॉजी और केमिस्ट्री के मेल से बनी विज्ञान की यह शाखा छात्र-छात्राओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है।
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माइक्रोबायोलॉजी ऐसा क्षेत्र है, जिसमें विशेषज्ञता हासिल करने के बाद ही आगे बढ़ा जा सकता है। दरअसल, माइक्रोबायोलॉजी का इस्तेमाल स्वास्थ्य, पर्यावरण, सेवाओं और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात इस क्षेत्र से जुड़ी है कि अगर आप में शोध करने की प्रवृत्ति है, तब यह क्षेत्र आपको और भी अच्छा लगेगा। इसके अंतर्गत फिजियोलॉजी ऑफ माइक्रोब्स, माइक्रोब्स की जैविक संरचना, एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी, फूड माइक्रोबायोलॉजी, बायोफर्टिलाइजर में माइक्रोब्स, कीटनाशक, पर्यावरण, मानवीय बीमारियों आदि में सूक्ष्म जीवों का अध्ययन किया जाता है। बीयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋषि सक्सेना ने बताया कि पर्यावरण में हम जो कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं, उससे उत्पन्न प्रदूषण को ये सूक्ष्मजीव ही नियंत्रित करते हैं। इसके अलावा दवाओं का निर्माण, कीटनाशकों का निर्माण, विभिन्न खाद्य उत्पादों आदि में सूक्ष्म जीवों का अध्ययन भी किया जाता है।
पर्यावरण का क्षेत्र हो या पर्यावरण संतुलन का, खाद्य संरक्षण, दवाओं के उद्योग विशेषकर एंटीबायोटिक, फैक्टरियों, मेडिकल क्षेत्र, कृषि उत्पादन, पेय पदार्थों के निर्माण, रसायन फैक्टरियों, सुगंध बनाने आदि में इसका काफी उपयोग है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट के रूप में आप किसी वैज्ञानिक के साथ शोध कार्य कर सकते हैं। साथ ही अस्पताल, लेबोरेट्री, क्लीनिक, विश्वविद्यालय, निजी या सरकारी क्षेत्र, फार्मास्यूटिकल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शिक्षण आदि क्षेत्रों में जुड़ सकते हैं। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य भी कर सकते हैं। बायोटेक एवं बायोप्रोसेस, संबंधी उद्योग के अलावा विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में भी रोजगार के अवसर हैं। यह क्षेत्र शोध पर आधारित है, इसलिए काफी मेहनत और समय की जरूरत होती है।
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बीयू में चल रही प्रवेश प्रक्रिया
बीयू कैंपस में चल रहे व्यावसायिक कोर्सों के लिए प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। छात्र-छात्राएं 10 अगस्त तक फॉर्म भर सकते हैं। हालांकि, एक अगस्त से विलंब शुल्क लगने लगेगा।
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इंटरमीडिएट पास के लिए
कोर्स का नाम: बीएससी ऑनर्स इन माइक्रोबायोलॉजी
योग्यता: विज्ञान संकाय से इंटरमीडिएट
चयन: सीधे प्रवेश
अवधि: तीन साल
सीट: 60 ,फीस: 18,700
स्नातक पास के लिए
कोर्स का नाम: एमएससी इन माइक्रोबायोलॉजी
योग्यता: बीएससी बायोलॉजी/लाइफ साइंस
चयन प्रक्रिया: प्रवेश परीक्षा
अवधि: दो साल
सीट: 40, फीस: 58,000
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