झांसी। ड्रैगन फ्रूट को बुंदेलखंड की जलवायु भा रही है। पहले ही साल इसमें अच्छा उत्पादन देखने को मिला है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के शोध में ये बात सामने आई है। विश्वविद्यालय ने 500 से 2000 पौध भी तैयार कर ली है, जिसे किसानों को देने की तैयारी है।
केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में महाराष्ट्र, गुजरात, बंगाल, दिल्ली, दक्षिण भारत से ड्रैगन फ्रूट के 500 पौधे मंगवाए गए थे। फल विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों ने इन पौधों को विश्वविद्यालय परिसर में ही लगाया। साथ ही अनुसंधान शुरू कर दिया। बताया गया कि पहले साल प्रत्येक पौधे में से पांच-छह फल आए हैं, जो कि काफी अच्छा है। एक ड्रैगन फ्रूट का वजन भी 500-700 ग्राम तक है। इस वजन के फ्रूट की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। एक ड्रैगन 100 रुपये के आसपास बिकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बुंदेलखंड की जलवायु इस फ्रूट को काफी भा गई है। यदि किसान इसकी खेती करते हैं तो अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। साथ ही एक एकड़ जमीन में इसकी पौध तैयार करके भी एक से दो लाख रुपये सालाना कमाई हो सकती है। इसके फलों का उपयोग विभिन्न उत्पाद जैसे जैम, आइसक्रीम, जेली, फेस पैक, जूस आदि बनाने में भी होता है।
एक बार लगाएं, 20 साल तक उत्पादन
विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक एक बार ड्रैगन फ्रूट लगाने पर 20 साल तक उत्पादन देता रहता है। दूसरे साल से अच्छी खासी उपज शुरू हो जाती है। बताया कि विश्वविद्यालय के तैयार 2000 पौधों को अब किसानों को वितरित किया जाएगा।
50 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा में भी होता
ड्रैगन फ्रूट 50 सेंटीमीटर की वार्षिक वर्षों वाले क्षेत्रों में भी हो सकती है। इसके लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना गया है। बलुई दोमट मृदा या रेतीली मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त है। औसतन एक हेक्टेयर में 2500 पौध लगाए जाते हैं। तीसरे साल में पूर्णरूप से फल आने लगते हैं।
शोध में साबित हो गया है कि बुंदेलखंड की जलवायु ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए मुफीद है। साथ ही जो उपज आई है, वो काफी अच्छी है। अब इसे और व्यापक स्तर पर करने की तैयारी है। साथ ही जो 2000 पौध तैयार की गई है, उसे किसानों को भी दिया जाएगा। - डॉ. अरविंद कुमार, कुलपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।