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काम खत्म होने से पहले ही खत्म हुआ बजट, परियोजना रह गई अधूरी

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झांसी। सरकार की 100 दिन की कार्ययोजना में शामिल बड़वार नहर परियोजना का काम लागत बढ़ जाने के चलते बीच में ठप पड़ गया। निर्माण सामग्री का दाम बढ़ने, जमीन की लागत बढ़ने, टैक्स समेत अन्य वजहों से प्रोजेक्ट की लागत करीब 12 करोड़ बढ़ गई है। करीब 85 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद बजट खत्म हो जाने से यह काम ठप पड़ गया।
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गुरसराय स्थित बड़वार झील के पुनर्जीवन के लिए वर्ष 2016 में 48.73 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बना। करीब दो साल तक पैसा न मिलने से काम अटका रहा। वर्ष 2018 में बजट स्वीकृत होने पर काम शुरू हुआ। योगी सरकार की वापसी के बाद बनी सौ दिन की कार्ययोजना में इस प्रोजेक्ट को भी शामिल कर लिया गया लेकिन, काम खत्म होने से पहले बजट खत्म हो गया। सिंचाई अभियंताओं का कहना है कि वस्तुओं का दाम बढ़ जाने से लागत में इजाफा हो गया। यहां साढ़े नौ किमी लंबी सड़क से नहर गुजारने में करीब 3.50 करोड़ रुपये खर्च हो गए जबकि प्रोजेक्ट में महज 55 लाख अनुमानित था। इसी तरह करीब तीन हेक्टयर जमीन अतिरिक्त अधिग्रहीत करनी पड़ी। पोल शिफ्टिंग का काम भी कराना पड़ा। अभियंताओं का कहना है कि प्रोजेक्ट तैयार करते समय जीएसटी प्रावधान नहीं था जबकि 12 प्रतिशत की दर से करीब 4 करोड़ रुपये जीएसटी के चुकाने पड़े। इस तरह प्रोजेक्ट की लागत करीब 12 करोड़ रुपये बढ़ गई। बजट के मुताबिक करीब 85 फीसदी काम ही पूरा हो सका।
जितना बजट स्वीकृत हुआ था, उसके मुताबिक करीब 85 फीसदी काम पूरा हो चुका। थोड़ा काम ही बाकी बचा है। शेष रकम के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। उसकी मंजूरी मिलते ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा। रबी सीजन तक प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।
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संजीव झा, अधीक्षण अभियंता (बेतवा)
साल भर तक झील को भरे रखने की थी योजना
इस नहर परियोजना के जरिए बेतवा नदी से बड़वार झील को भरने की योजना है। इसके लिए करीब 13 किलोमीटर लंबा लिंक फीडर बनाया गया है। बारिश न होने की वजह से यह झील अक्सर खाली रहती थी। बेतवा नदी से भरे जाने के बाद इस झील में साल भर पानी रहेगा। इससे गुरसराय के हीरानगर, भदरवारा, वीरपुरा समेत अन्य दर्जनों इलाकों के लोगों को न सिर्फ पीने का पानी मिलेगा बल्कि छह हजार हेक्टेयर भूमि भी सिंचित की जा सकेगी।
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