अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव को लेकर मचे घमासान के चलते पिछले एक साल से अधिवक्ता ऊहापोह में फंसे हैं। खास तौर से चुनावी तैयारियों में जुटे अधिवक्ताओं को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। पिछले एक साल से यह उम्मीदवार चुनाव के इंतजार में ही पैसा खर्च कर रहे हैं।
बता दें, जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव कराने का मामला पिछले करीब एक साल से बार काउंसिल, हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के बीच फंसा हुआ है। इसी बीच दो पक्षों के बीच फैसले आए। बार पदाधिकारियों के खिलाफ फैसला आने से चुनाव की सुगबुगहाट शुरू हो जाती। उम्मीदवार चुनावी तैयारी शुरू कर देते। कुछ ही समय बाद बार पदाधिकारियों के पक्ष में फैसला आते ही उम्मीदवारों की गतिविधियां थम जातीं। पिछले एक साल से यह चल रहा है। 18 मई को आए फैसले के बाद उम्मीदवारों में चुनाव होने की उम्मीद फिर जग गई। मंगलवार से ही कई उम्मीदवार प्रचार करते दिखे। अध्यक्ष समेत मंत्री पद के उम्मीदवार कचहरी परिसर में एक दूसरे से मुलाकात करते दिखे हालांकि अभी 22 मई को हाईकोर्ट की डबल बेंच से फैसला आना बाकी है।
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चुनाव की तैयारी चल रही है लेकिन, चुनाव होगा कि नहीं यह साफ नहीं है। समय पर चुनाव होने से अधिवक्ताओं को अच्छे प्रतिनिधि मिलते हैं।
दीपक यादव, अधिवक्ता
समय से चुनाव होना चाहिए। चुनाव की तैयारी कई अधिवक्ता कर रहे हैं लेकिन, एक साल से सभी असमंजस में फंसे हुए हैं।
लक्ष्मी प्रजापति, अधिवक्ता