- सड़क पर कीचड़ होने की वजह से एक किमी पहले रुक गई एंबुलेंस
- प्रसव पीड़ा से तड़पती रजनी को परिजन पैदल और बाइक से लेकर पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगरा। गांव में पक्की सड़क नहीं है, रास्ता कीचड़ से लथपथ है। इस हालात में प्रसव पीड़ा से रजनी तड़प रही थीं। परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस आई जरूर, लेकिन कीचड़ भरे रास्ते ने उसे करीब एक किलोमीटर पहले ही रोक दिया। इसके बाद प्रसूता को कभी पैदल तो कभी मोटरसाइकिल पर बैठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ा। यह मामला विकासखंड बंगरा की ग्राम पंचायत मगरवारा के करीब 1500 आबादी वाले खिरक मंजूबारा-छिंगेवारा का है।
शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे खिरक मंजूबारा निवासी रजनी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस बुलाई। कुछ देर बाद एंबुलेंस गांव की ओर पहुंची, लेकिन आगे का रास्ता इतना खराब था कि चालक उसे आगे नहीं ले जा सका। करीब एक किलोमीटर पहले वाहन खड़ा करना पड़ा। इसके बाद प्रसूता को लेकर परिजन बदहाल रास्ते पर निकल पड़े। प्रसव पीड़ा से परेशान रजनी को कुछ दूरी तक पैदल ले जाया गया और फिर मोटरसाइकिल से एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। वहां से उन्हें बंगरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां बच्ची ने जन्म लिया। शनिवार को परिजन अस्पताल से निजी वाहन से दोनों को घर ले आए।
दर्द रजनी का था, मजबूरी पूरे गांव की
रजनी के पति जयप्रकाश कुशवाहा ने बताया कि गांव के लोगों की मुश्किल सिर्फ बारिश के दिनों तक सीमित नहीं है। मुख्य सड़क तक पहुंचने वाला रास्ता कीचड़ और कटीली झाड़ियों से भरा है। ऐसे में एंबुलेंस, स्कूल वाहन और दूसरे जरूरी वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा कि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से दूर है। जनप्रतिनिधियों की ओर से सड़क बनवाने के वादे कई बार किए गए, लेकिन अब तक रास्ते की तस्वीर नहीं बदली।
बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत
इस मजरे के लोगों के लिए खराब रास्ता रोजमर्रा की परेशानी बना हुआ है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है तो बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में यह समस्या और बढ़ जाती है। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने से किसी भी आपात स्थिति में समय पर मदद मिलना मुश्किल है।
किसानों की निजी जमीन आ रही आड़े
प्रधान मुन्नी देवी ने बताया कि रास्ते में किसानों की निजी जमीन पड़ती है। इसी वजह से पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की जमीन का मुआवजा देकर भूमि लेनी होगी, तभी पक्की सड़क का निर्माण संभव हो सकेगा।
मौके का गहनता से निरीक्षण कराया जाएगा। स्थिति के अनुसार उच्च स्तर पर जानकारी भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या के समाधान का जल्द प्रयास किया जाएगा। - सुनील कुमार सिंह, खंड विकास अधिकारी, बंगरा