झांसी। सीपरी बाजार ओवरब्रिज में फिर अड़ंगा लग गया है। अधूरे काम को पूरा कराने के लिए कोई कंपनी आगे नहीं आई है। काम के लिए 28 जून तक टेंडर मांगे थे, लेकिन तय तिथि तक किसी ने आवेदन नहीं किया। इससे रेल प्रशासन की दिक्कतें बढ़ गई हैं। नया टेंडर होने पर ही अब आगे का काम शुरू हो सकेगा। इससे लगता है कि इस साल ओवरब्रिज का काम पूरा नहीं हो सकेगा।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज का पिछले एक साल से गार्डर न मिलने के कारण काम लटका है। कंपनी बार-बार कहती रही कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड से लोहा न मिलने के कारण गार्डर नहीं बन पा रहे हैं। यहां के लिए उत्तराखंड के काशीपुर से गार्डर बनकर आने हैं। वहीं, तीसरी रेल लाइन के बीच आ रहे पुलों के लिए गार्डर बराबर मिल रहे हैं। इस पर निर्माण शाखा के अफसरों को शंका होने पर कंपनी की कार्य प्रणाली की जांच करवाई थी। जांच में पता लगा कि कंपनी ने सेल में पैसा ही जमा नहीं किया, इससे गार्डर नहीं मिल पा रहे हैं।
रेल प्रशासन को धोखे में रखने पर पिछले दिनों कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया गया। बाकी काम के लिए नए सिरे से टेंडर मांगे गए थे। 28 जून तक टेंडर आमंत्रित किए गए थे, लेकिन तय तिथि तक किसी ने आवेदन नहीं किया। अब एक बार फिर नए सिरे से टेंडर मांगे जाएंगे। टेंडर होने के बाद ही आगे का काम शुरू होगा। इस हिसाब से अब इस साल ओवरब्रिज का काम पूरा होने की कोई उम्मीद नहीं है। ओवरब्रिज निर्माण को लेकर लोगों को अभी और समस्या का सामना करना पड़ेगा।
मालूम हो कि प्रदेश सरकार ने 2012 में ओवरब्रिज निर्माण को स्वीकृति दी थी। राज्य सेतु निगम अपने हिस्से का काम 2016 में पूरा कर चुका है। जबकि, रेलवे अपने हिस्से का काम पिछले पौने तीन साल से कर रहा है। रेलवे ने दिल्ली की मैक्स आउट इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी को ठेका दे रखा है। कंपनी को 22 करोड़ के काम को दो साल में पूरा करके देना था। मगर, कंपनी पौने तीन साल में अपने हिस्से का 55 फीसदी ही काम पूरा कर सकी है।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज के अधूरे काम को पूरा कराने के लिए 28 जून तक आवेदन मांगे गए थे। मगर, किसी कंपनी ने आवेदन नहीं किया। एक हफ्ते में अब दोबारा टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
- मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
कंपनी ने अभी तक ये किए काम
सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण में रेलवे के हिस्से के चारों पिलर बनाने और उनके ऊपर बीम डालने का काम पूरा हो गया है। चित्रा चौराहे की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखे जा चुके हैं। इसमें एक गार्डर का वजन 75 टन है, जो उत्तराखंड के काशीपुर से बनकर आए हैं।
ये काम बाकी
अभी पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। गार्डर आने के बाद पहले सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम होना है। इसके बाद एक साथ 50 और 36 मीटरों के गार्डर के बीच शटरिंग लगाने, सरिया बांधने और सड़क बनाने का काम होगा।