झांसी। रानी लक्ष्मीबाई के कारण प्रसिद्धि पाए झांसी का नाम अब मंदिर के नाम से भी जाना जाएगा। महानगर का एक ऐसा मंदिर चुना जाएगा जो ख्याति प्राप्त हो और वहां काफी संख्या में श्रद्धालु आते हों। ऐसे मंदिर को शासन सभी सुविधाओं से लैस करेगा। मंदिर का विकास कर उसे प्रदेश के पर्यटन नक्शे में शामिल कराया जाएगा।
शासन प्रदेश के पर्यटन विकास को लेकर हर संभव योजनाओं पर काम करने का प्रयास कर रहा है। इसके तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ऐसे मंदिरों को चुना जाना है जहां पर दूर-दूर से लोग पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं। ऐसे मंदिरों में सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शासन ने नगर निगम को पत्र भेज कर अपने क्षेत्र का एक ऐसा मंदिर चुनने को कहा है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा के लिए उमड़ते हों। ऐसे मंदिर में वाहन खड़े करने के लिए पार्किंग, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशाला, मार्ग प्रकाश, सड़क, नाली आदि सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
शासन का निर्देश मिलते ही नगर निगम ने ऐसे मंदिर की तलाश शुरू कर दी है। विभिन्न मंदिरों की स्थिति के साथ वहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या जानने का प्रयास किया जा रहा है।
इन मंदिरों पर हो रहा है विचार
नगर निगम इस योजना में चुनने के लिए पंचकुइया मंदिर, काली जी का मंदिर, गणेश मंदिर, लहर की देवी मंदिर आदि पर विचार कर रहा है। इनके अलावा अन्य मंदिरों पर भी चर्चा की जा रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो काली जी के मंदिर के पक्ष में फैसला जा सकता है। इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन व पूजन के लिए आते हैं। इस मंदिर में देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी पूजन करा चुकी हैं।
मानक के अनुरूप मंदिर को चुनने की प्रक्रिया चल रही है। आम लोगों से भी अनुरोध है कि यदि कोई सुझाव हो तो वह नगर निगम को उससे अवगत कराएं।
रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, झांसी।