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Jhansi News: टेली मेडिसिन सेंटर के लिए खुद का ऑफिस नहीं, परेशान होते हैं मरीज

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मेडिकल कॉलेज में हेपेटाइटिस के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर (ओपीडी) में बना गया है टेली मेडिसिन सेंटर
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मंडलायुक्त के सख्त निर्देश के बावजूद टेली मेडिसिन सेवा सुचारू नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज में चल रहे टेली मेडिसिन सेंटर पर तीन डॉक्टर तैनात हैं, जो गाहेबगाहे नजर आते हैं। हेपेटाइटिस के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर (ओपीडी) में टेली मेडिसिन सेंटर बनाया गया है। इसलिए जरूरतमंद इसे ढ़ूंढ ही नहीं पाते हैं। दोपहर दो बजे ओपीडी बंद होते ही सेंटर भी बंद हो जाता है और यहां के डॉक्टर चले जाते हैं।
शासन ने अस्पताल तक पहुंच पाने में असमर्थ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए टेली मेडिसिन की सेवा शुरू की है। इसके लिए, लोगों को ई-संजीवनी के माध्यम से डॉक्टर समुचित दवा के साथ-साथ परामर्श देते हैं। गांवों में कम्युनिटी मेडिसिन सेंटर पर आने वाले लोगों को उपचार दिलाने के लिए सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) ऑनलाइन डॉक्टर को रोगी का हाल बताकर उपचार करते हैं। यह व्यवस्था काफी दिनों से बेहाल चल रही है, जिसकी पुष्टि विगत दिनों मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे के ट्रायल से सामने आई। जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों की जमकर क्लास लगाते हुए जल्द सुधार के लिए निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, यह व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है।
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अस्पाल में कहीं भी टेली मेडिसिन सेंटर अंकित नहीं हैं। न टेली मेडिसिन से उपचार लेने की तरकीब लिखी हुई है। खुद टेली मेडिसिन से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि वह मेडिकल कॉलेज में दोपहर दो बजे ओपीडी खत्म होने के बाद चले जाते हैं क्योंकि कमरा बंद हो जाता है। शुक्रवार दोपहर करीब 1.30 बजे सेंटर पर सिर्फ मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर के डॉक्टर मौजूद थे। पूछने पर पता चला कि फिलहाल टेली मेडिसिन का कोई डॉक्टर नहीं है। जब ड्यूटी पर तैनात डॉ. अनुराध से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह जरूरी काम से निकल आई हैं। इसके करीब 15 मिनट बाद ड्यूटी पर तैनात डॉ. रवि ने फोन करके बताया कि वह जरूरी काम से बाहर आ गए थे। बताया कि हमारे बैठने के लिए कमरा तक नहीं है। हेपेटाइटिस की ओपीडी में बैठते हैं, वह भी दोपहर दो बजे बाद बंद हो जाती है। इसके बाद दूसरी जगह बैठकर संपर्क करना होता है।
वहीं, मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंदेल ही टेली मेडिसिन के नोडल अधिकारी हैं। उन्होंने दावा किया कि टेली मेडिसिन के डॉक्टर नियमित रूप से सेंटर पर बैठकर पूरी ड्यूटी करते हुए परामर्श दे रहे हैं।
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प्रतिदिन 100 लोगों को देना है परामर्श, देखे सिर्फ 32
डॉ. रवि ने बताया कि सुबह नौ से शाम चार बजे तक टेली मेडिसिन सेवा देनी होती है। प्रतिदिन 100 मरीजों को देखना होता है। जब उनसे रिकॉर्ड के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया एक से चार जुलाई तक का रिकॉर्ड मुख्यालय से नहीं मिला है। 30 जून के रिकॉर्ड में सिर्फ 32 लोगों को परामर्श का डाटा मिला, जिस पर तर्क दिया कि जरूरी काम की वजह से मरीज नहीं देखे।
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