झांसी। मंडल के झांसी, ललितपुर और जालौन के ग्रामीण क्षेत्रों में जुलाई से अभी तक धड़ाधड़ ट्रांसफार्मर (परिवर्तक) खराब हो रहे हैं। ऐसा वर्कशॉप में घटिया मरम्मत के कारण हो रहा है। ऊर्जा मंत्री ने विधायकों की शिकायत पर ट्रांसफार्मर खराब होने और समय से न बदलने के कारणों का पता लगाने के लिए डायरेक्टर तकनीकी एसके गुप्ता को जांच सौंपी है, जो जल्द ही झांसी आएंगे।
मंडल के तीनों जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जुलाई से अभी तक एक हजार से अधिक ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। ट्रांसफार्मर खराब होने पर ग्रामीणों को कई दिनों तक बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई भी नहीं हो पाती है। वर्कशाप में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इस बात की शिकायत विधायकों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आयोजित समीक्षा बैठक में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से की थी। ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर ट्रांसफार्मरों के जल्दी- जल्दी खराब होने का पता करने और उनके समय पर न बदलने के कारणों की जांच का जिम्मा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक तकनीकी को सौंपा गया है।
जनपद में फुंके 444 ट्रांसफार्मर
जुलाई महीने में झांसी जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 444 ट्रांसफार्मर खराब हो गए। जबकि पिछले साल इसी महीने में 426 ट्रांसफार्मर खराब हुए थे।
- बरसात में ट्रांसफार्मर बनाने की गति धीमी पड़ जाती है। इसलिए उनको बदलने में वक्त लग रहा है। दूसरे वर्कशाप से भी ट्रांसफार्मर मांगे गए हैं। अभी झांसी जनपद में 60 ट्रांसफार्मर फुंके चल रहे हैं, जिनको एक- एक कर बदला जा रहा है। ट्रांसफार्मर फुंकने का कारण ओवरलोडिंग की समस्या है। धान की सिंचाई में बिजली का अधिक उपयोग हो रहा है।
अनीस कुमार माथुर, अधिशासी अभियंता (वर्कशाप)।
बिजली चोरी रोकने के लिए विधायकों से मांगी मदद
मुख्य अभियंता (वितरण) मनोज कुमार पांडे ने बताया कि तीनों जनपदों में 30-30 फीडरों को चिह्नित किया गया, जहां सबसे अधिक लाइन लॉस (चोरी व अन्य हानियां) हो रहीं हैं। इन सभी फीडरों पर जांच शुरू कर दी गई है। तीस फीडरों की जांच का जिम्मा विजिलेंस को सौंपा गया है। साथ ही, संबंधित विधायकों को दस- दस फीडरों की सूची दी गई है। उनसे आग्रह किया गया है कि वे उक्त फीडरों से जुड़े संबंधित गांवों के प्रधान से बातचीत कर वहां चोरी रुकवाने में सहयोग करें। ग्रामीणों को बिल जमा करने के लिए प्रोत्साहित करें। झांसी और जालौन जनपद में दो लाख ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्होंने कनेक्शन लगने के बाद से कभी बिल का भुगतान नहीं किया।