झांसी। कोरोना से जंग जीतने के बाद एक व्यक्ति ने अपना प्लाज्मा डोनेट किया है। झांसी में इस तरह का यह पहला मामला है। हालांकि, एक और व्यक्ति अपना प्लाज्मा डोनेट करने आया था लेकिन पल्स रेट कम होने के कारण उसका प्लाज्मा नहीं लिया गया। अब कोविड के गंभीर मरीज की झांसी में ही प्लाज्मा थेरेपी की जा सकेगी।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज ने प्लाज्मा ब्लड बैंक शुरू करने को लेकर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में आवेदन किया था। बताया गया कि जब तक अनुमति नहीं मिलती है, तब तक निजी ब्लड बैंक से करार करते हुए वहां उपयुक्त संसधान होने पर प्लाज्मा डोनेट करवाने की अनुमति दे दी गई है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज ने परख ब्लड बैंक में मशीन आदि संसाधन होने पर करार कर लिया। बृहस्पतिवार को कोरोना को हराकर स्वास्थ्य हो चुके जेडीए कर्मचारी समेत दो लोग अपना प्लाज्मा डोनेट करने के लिए ब्लड बैंक पहुंचे। इसमें दोनों व्यक्तियों का एंटीबॉडी टेस्ट किया गया। दोनों में ही एंटीबॉडी पर्याप्त मात्रा में होने पर एचआईवी समेत गंभीर बीमारियों की जांच की गई। हालांकि, एक व्यक्ति का पल्स रेट कम होने की वजह से फिलहाल उसका प्लाज्मा लेने से मना कर दिया गया। उसे दोबारा आने के लिए कहा गया। वहीं, जेडीए कर्मचारी झांसी का पहला व्यक्ति बना, जिसने कोरोना को मात देने के बाद प्लाज्मा डोनेट किया। अब कोविड के गंभीर मरीज को जरूरत पड़ने पर प्लाज्मा थेरेपी की जा सकेगी।
क्या है प्लाज्मा थेरेपी
प्लाज्मा थैरेपी गंभीर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके मामलों में काम करती है। इसमें कोरोना वायरस से उबर चुके मरीज से एंटीबॉडीज ली जाती है और उन्हें बीमारी व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है। इससे शरीर की इम्यूनिटी को नई ताक़त मिलती है और वह इस बीमारी से लड़ पाती है। देश में कई कोविड मरीज गंभीर अवस्था में पहुंचने के बाद प्लाज्मा थेरेपी से ठीक हो चुके हैं।
आपकी जान बची, अब दूसरों की बचाएं
झांसी में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 2940 है, इसमें से 2227 लोग ठीक हो चुके हैं। अमर उजाला इन सभी मरीजों से अपील करता है कि इस महामारी से लड़ाई में ये 2227 लोग अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। चूंकि, कोरोना से ठीक होने के बाद इनमें एंटीबॉडी बन गई है। ऐसे में यह अपना प्लाज्मा डोनेट करके कई गंभीर कोविड मरीजों को मौत के मुंह में जाने से बचा सकते हैं। इसलिए अधिक से अधिक लोग पहुंचकर अपना प्लाज्मा डोनेट कर दूसरों की जान बचाने में अपनी भूमिका निभाएं।