बड़ागांव का प्राथमिक विद्यालय प्रीतमपुर एक शिक्षिका के भरोसे चल रहा है। जबकि, स्कूल में शिक्षकों के चार पद सृजित हैं। विज्ञान की शिक्षिका पांच कक्षाओं के विद्यार्थियों को अकेले ही हिंदी, संस्कृत व अन्य विषय पढ़ाने को मजबूर हैं। ऐसे में ‘देश के भविष्य’ की नींव कैसी पड़ रही है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रीतमपुर प्राथमिक विद्यालय में एक से पांच तक कक्षाएं चलती हैं। सभी कक्षाओं को मिलाकर स्कूल में 68 विद्यार्थी पढ़ते हैं। स्कूल में चार शिक्षकों के पद हैं, इनमें एक शिक्षिका लंबे समय से बिना सूचना के गायब चल रही है। प्रधानाध्यापक मनोज यादव को एबीआरसी बना दिए गए हैं। 15 सितंबर से एक शिक्षिका चाइल्ड केयर लीव पर चली गई हैं। ऐसे में पूरा कार्यभार सहायक शिक्षिका इंद्रा सिंह पर आ गया है। इंद्रा विज्ञान की शिक्षिका होने के बावजूद छात्र-छात्राओं को हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान भी पढ़ाती हैं। उन्हें पांचों कक्षाओं के बच्चों पर नजर रखनी पड़ती है।
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नहीं है स्पीड ब्रेकर, बाउंड्रीवाल छोटी
विद्यालय हाइवे के किनारे है। ठीक बगल से एक मार्ग लकारा गांव की ओर जा रहा है। हाइवे और लकारा रोड पर स्पीड ब्रेकर न होने से हमेशा विद्यार्थियों के हादसे का शिकार होने की आशंका बनी रहती है। बताया गया कि पिछले साल एक छात्र बाइक से टक्कर होने से चोटिल भी हो चुका है। बाउंड्रीवाल भी छोटी होने से बड़ी कक्षा के विद्यार्थी दीवार फांदकर भाग जाते हैं।
102 एकल विद्यालय
जनपद में 102 एकल विद्यालय चल रहे हैं। अधिकतर एकल विद्यालय दूरदराज के गांवों में हैं। यहां पर सिर्फ एक ही शिक्षक छात्र-छात्राओं को पढ़ाता है। इन हालातों में अच्छी पढ़ाई की उम्मीद भला कैसे की जा सकती है। नियमानुसार 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए।
रोक से नहीं हो पा रहा स्थानांतरण
कोर्ट द्वारा पूरे प्रदेश में शिक्षकों के समायोजन और स्थानांतरण पर रोक लगा रखी है। ऐसे में जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जा पा रहा है।
- हरिवंश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी।