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पूर्वज परोसते रहे बीमारी, वंशज जा रहे उपचार खोजने

Mon, 05 Sep 2016 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
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पूर्वज परोसते रहे बीमारी, वंशज जा रहे उपचार खोजने - फोटो : demo pic
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झांसी। एक शिक्षक ने बदल दिया पूरा परवई दातार नगर गांव को। कभी यहां कच्ची शराब के धंधे में कबूतरा समाज के बच्चे व युवा अपने परिवार के साथ जुटे रहते थे। वह आज शिक्षा पाने की राह पर है। यह कहना है गांव एवं कबूतरा समाज के युवा आशीष कुमार का, जो स्वयं बीफार्मा कर रहे है, ताकि अपने समाज को योगदान दे सके।
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आशीष के मुताबिक कुछ वर्ष पूर्व तक ही गांव की स्थितियां अलग थी। कोई नहीं जानता था कि कच्ची शराब का धंधा गलत है। शिक्षा कोसों दूर थी। लेकिन राजकुमार आचार्य के गांव में आने से स्थितियां पूरी तरह से बदल गई। उन्होंने गांव के प्रत्येक पुरुष व महिलाओं को जागृत किया। आज गांव के लगभग सभी परिवार कच्ची शराब का धंधा छोड़ चु़के  है। खेती किसानी करने लगे है। जिनमें एक मेरा परिवार भी है।

मां सरस्वती की कृपा बरस रही है। राजकुमार आचार्य की सहयोग से मैने कोटा में सीपीएमटी की तैयारी की और आज बीफार्मा कर रहा हू। उनके शैक्षिक योगदान से गांव में कई लड़कियों, महिलाओं ने इंटर एवं बीए कर लिया। इनमें से एक मेरी भाभी भी है, जिन्होंने बीए कर लिया है। कुछ लड़क ों ने तो एमफिल व बीएड भी कर लिया है। अब गांव के 99 प्रतिशत बच्चे पढ़ रहे है। वह खुद समय - समय पर बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाते है।  
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राजकुमार आचार्य का परिचय
राजकुमार द्विवेदी आचार्य मूलत: हमीरपुर के निवासी है। वर्ष 93 में झांसी आने पर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में पठन पाठन किया। इसके बाद नौकरी छोड़ कर वर्ष 2000 में शिक्षा जागरण में जुट गए। वर्ष 2005 में ग्राम पंचायत परवई के दातार नगर में शिक्षा का अभियान जो चलाया, वह अब तक जारी है। वह खालसा स्कूल के समीप सरस्वती संस्कार केंद्र के  माध्यम से गरीब लड़कों व लड़कियों को नि:शुल्क पठन पाठन कराते है। वर्तमान में प्रेमगंज निवासी आचार्य जी की पत्नी ऊषा द्विवेदी बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका है।
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