जिले में टीबी की जांच तेज करने के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सीएचसी मोंठ, गुरसराय और मऊरानीपुर में ट्रू नेट मशीनें लगवाई हैं। इस मशीन से जांच होने पर टीबी के मरीज की जल्द पहचान हो जाती है। पिछले डेढ़ महीने में 124 टीबी के नए रोगी मिल चुके हैं। सभी का उपचार भी शुरू कर दिया गया है।
जिले में आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें तीन सीएचसी में टीबी की ट्रू नेट जांच शुरू हो गई है। मशीन में सैंपल लगने के बाद दो घंटे में क्षय रोग का पता चल जाता है। इससे क्षय रोगियों का जल्द उपचार शुरू होने में मदद मिल रही है। बताया गया कि पिछले डेढ़ महीने में गुरसराय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 65, मोंठ में 31 और मऊरानीपुर सीएचसी में 28 टीबी रोगी मिले हैं। इसमें गुरसराय में तीन, मोंठ और मऊरानीपुर में दो-दो एमडीआर रोगी शामिल हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजकिशोर ने बताया कि जितने भी टीबी रोगी मिले हैं, उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। ट्रू नेट मशीन से टीबी रोगियों की जल्द पहचान होने में काफी मदद मिल रही है।
पांच सीएचसी में सैंपल जांच में सात दिन तक लग जाते
मोंठ, गुरसराय और मऊरानीपुर को छोड़कर अन्य सीएचसी में अभी फॉल्कन ट्यूब में टीबी जांच के सैंपल रखकर पोस्ट ऑफिस के जरिए जिला क्षय रोग चिकित्सालय भेजे जाते हैं। दूरदराज के सैंपल आने में कई बार एक सप्ताह तक का समय लग जाता है। टीबी अस्पताल के अलावा जिला अस्पताल में एक सीबी नेट मशीन है। एक बार में मशीन में चार सैंपल लगते हैं। दो घंटे के बाद मशीन जांच रिपोर्ट देती है। यदि दस घंटे भी दोनों मशीन चलीं तो दिनभर में 40 सैंपलों की ही जांच हो पाती है।