अब खादी वस्त्रों पर जीएसटी लगेगा। उपभोक्ताओं को अब खादी के एक हजार रुपये तक के कपड़े खरीदने पर पांच प्रतिशत और इससे ज्यादा की खरीदारी पर 12 प्रतिशत टैक्स देना है।
महात्मा गांधी ने कहा था- खादी वस्त्र नहीं विचार है। आजादी के पहले उनके इसी विचार से प्रेरित होकर लाखों देशवासियों ने विदेशी वस्त्रों को त्याग कर कपड़ों की होली जलाई थी। 1947 में देश आजाद होने के साथ ही ग्रामीण कामगारों को काम देने के लिए खादी ग्राम उद्योग का गठन हुआ। आज इस उद्योग से हजारों कामगार जुड़े हुए हैं। अभी तक खादी को टैक्स मुक्त रखा गया था। लेकिन अब केंद्र सरकार ने जीएसटी में खादी के कपड़ों को भी टैक्स के दायरे में ला दिया है। सरकार का टैक्स लगाने का उद्देश्य खादी से जुड़े कामगारों और कारोबारियों को फायदा पहुंचाना है। हालांकि, जीएसटी में खादी से बनी गांधी की टोपी, राष्ट्रीय झंडे और खादी धागे को कर मुक्त रखा है। इसके अलावा कुर्ता- पजामा, चादर, तकिया और खादी से बने अन्य सभी तरह के वस्त्रों पर टैक्स लगा दिया गया है। इसमें एक हजार रुपये तक की खरीदारी पर पांच प्रतिशत और एक हजार से अधिक की खरीदारी पर 12 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किया गया है।