कस्बा के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के प्रांगण में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संस्कार सागर महाराज ने कहा कि विपरीत काल में भी निर्मल भावनाओं को आत्मसात करने के लिए हमें हमेशा पुरुषार्थ रत रहना चाहिए। मानव पर्याय हमारी माध्यम बनकर परम लक्ष्य प्राप्त करने का आधार बनती है और परमात्मा पद प्राप्त कराती है।
उन्होंने कहा कि आप चाहे तो मनुष्य बनकर पशु, नारकी, देव या भगवान बन सकते है। पार्श्वनाथ भगवान के आज दुनिया मे सबसे ज्यादा उपासक है, क्योंकि पार्श्वनाथ ने अपने दस भावों तक लगातार अपने भाई कमठ के उपसर्गों को सहन कर अपने आप को स्वर्ण की भांति तप्त किया। तत्पश्चात स्वर्णिंम आभा प्राप्त कर तीर्थंकर पद प्राप्त किया। इसी तरह अपने उपासकों को संसार सागर से कुएं की भांति, किसी बर्तन को फांस कर निकाल देते हैं और संसार सागर के भव बंधन से मुक्त करा देते हैं। बस भक्त को उनसे लगन भक्ति, निष्ठा और समर्पण की डोर बांधनी पड़ती है। हमारे सभी पुरूषार्थ सफल हो जाते है।
सभा मे आनन्द जैन, विनोद वैरागी, महावीर जैन, नरेंद्र जैन, चुतर्भुज जैन, प्रसन्न सिंघई, मनोज बापू, राजेंद्र जैन, मंगल जैन, नाथूराम जैन, रानू जैन, दईयन जैन, पवन जैन, शीतल जैन आदि मौजूद रहे। सुशील जैन ने बताया कि 29 जुलाई को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याण बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमे हरीश भइया मंगल विधान पूजन, अभिषेक आदि कार्यक्रमों को कराएंगे