11 मार्च को परिणाम आने तक उनमें तनाव रहेगा। शुक्रवार को प्रत्याशी थकान मिटाने के साथ जीत का गुणा भाग करते दिखे। अमर उजाला ने जैसा देखा, वैसा प्रस्तुत है।
परिवार के साथ समय बिताया
झांसी। 26 जनवरी को टिकट की घोषणा होने के बाद से सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी राहुल राय रात दिन एक किए पड़े थे। समय कम था और लक्ष्य बड़ा। यह 28 दिन उनकी जिंदगी के सबसे व्यस्ततम गुजरे। मतदान के अगले दिन शुक्रवार को फुर्सत मिली और समय परिवार के साथ गुजारा।
चुनाव के दरम्यान राहुल सुबह छह बजे घर से निकल पड़ते थे और रात में डेढ़-दो बजे घर पहुंच पाते थे। परिवार के अन्य सदस्य भी दिन भर जनसंपर्क में व्यस्त रहते थे। मां सुमन राय व पत्नी रिमझिम तिवारी भी महिलाओं की टोली के साथ दिन भर जनसंपर्क में व्यस्त रहतीं थीं, जबकि घर के पुरुष सदस्य अन्य चुनावी व्यवस्थाओं को संभाले थे। स्थिति यह थी कि परिवार के सदस्यों की आपस में मुलाकात भी नहीं हो पाती थी। मतदान के बाद शुक्रवार को राहुल सुबह छह बजे उठे। अखबार पढ़ा और परिवार के लोगों के साथ चाय पी। इसके बाद समर्थकों से मिलना और फोन पर चुनावी फीडबैक भी लेते रहे। पूरा दिन परिवार के साथ गुजरा। इस दौरान समर्थकों का आना भी लगा रहा। राहुल ने बताया कि वह अगले चरण के चुनावों में प्रचार के लिए शुक्रवार की रात बाहर निकल जाएंगे और पांच मार्च को वापस लौटेंगे।
सभी का मिला साथ
चुनाव में सभी जाति और धर्म के लोगों का समर्थन मिला है। सपा और यूपीए सरकार के कामों पर लोगों ने भरोसा जताया है। जाति और धर्म की राजनीति को लोगों ने ठुकराया है। यही जीत का आधार है। वोट उन क्षेत्रों में भी मिले, जिन्हें विरोधी प्रत्याशियों का गढ़ माना जाता है।
- राहुल राय, प्रत्याशी - सपा-कांग्रेस गठबंधन
(सीताराम कुशवाहा, बसपा प्रत्याशी)
नींद पूरी की और फुर्सत में समय बिताया
झांसी। वैसे तो महीनों पहले ही चुनाव की तैयारियां शुरू हो गईं थीं, लेकिन चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद से ही बसपा प्रत्याशी सीताराम कुशवाहा पूरी तरह से चुनावी रण में कूद पड़े थे। सुबह साढ़े चार बजे उठना और रात में सोने को कोई समय नहीं, यह दिनचर्या रह गई थी। मतदान के बाद शुक्रवार को उन्होंने अपनी नींद पूरी की और बाकी समय समर्थकों के बीच फुर्सत में बिताया।
चुनाव के दरम्यान वह सुबह घर से दलिया या खिचड़ी खाकर निकलते थे और पूरे दिन हल्का-फुल्का खाकर गुजार देते थे। परिवार के लोगों के साथ बातचीत तक का समय नहीं मिलता था। नियमित पूजा-पाठ का क्रम भी गड़बड़ा गया था। केवल अगरबत्ती भर लगाने का समय मिल पाता था। लेकिन, शुक्रवार को सुबह आराम से उठे। उसके बाद पाठ किया और शिवरात्रि होने की वजह से मंदिर भी गए। घर पर नाश्ता करके पहुंच गए चुनाव कार्यालय, जहां पूरा दिन समर्थकों के बीच तसल्ली से गुजारा। किस बूथ पर जीत हो रही है और किस पर हार, यही आंकलन चलता रहा। कुल मिलाकर बगैर किसी भागदौड़ के आराम से दिन गुजारा।
वोटरों का उत्साह, जीत का आधार
बसपा के वोटरों का उत्साह ही हमारी जीत का आधार है। जिन इलाकों से हमें वोट मिलने की उम्मीद थी, वहां की बूथों पर पचास से सत्तर फीसदी तक वोटिंग हुई। जबकि, विरोधियों के गढ़ में मतदान प्रतिशत पच्चीस तक पर सिमट गया।
- सीताराम कुशवाहा, बसपा प्रत्याशी
रवि शर्मा (भाजपा प्रत्याशी)
49 दिन बाद परिवार के साथ चाय पी
चुनाव की आपाधापी के बीच शुक्रवार को थकान मिटा रहे रवि शर्मा ने कुछ देर आराम भी किया। परिवार के साथ चाय पी और गोविंद चौराहा मढ़िया मुहल्ला स्थित मंदिर में भगवान शिव के दर्शन किए। साथ में भोजन भी किया।
वे सुबह सात बजे आम दिनों की तरह ही जागे। सुबह नौ बजे के बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलने जुलने का सिलसिला चलता रहा। हर किसी से पूछते थे- जीत तो रहे है ना। कोई कार्यकर्ता उत्साह से बोलता भाजपा की लहर में कौन हरा सकता है। हर कोने से वोट मिले है। यह बात शर्मा जी राहत देती रही। मोबाइल पर भी शुभचिंतक लगातार बधाई देते रहे। शिव बारात में शामिल होने के बाद वे उन समर्थकों के घर भी गए, जो उनके चुनाव में जी जान से जुटे रहे। शाम को जल्दी घर आ गए और पत्नी सुनीता और दिल्ली से आई बेटी राधिका के साथ वक्त गुजारा।
हर तरफ से मिला समर्थन
मतदाताओं ने मुझे नहीं पीएम मोदी को वोट दिया। पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही है। यही कारण है कि महानगर के हर कोने से मुझे वोट मिला। सबका समर्थन रहा। यह जीत मेरी नहीं, जनता और विकास की होगी।
रवि शर्मा, भाजपा प्रत्याशी।