संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। कृषि और पशुधन अपशिष्ट के उपयोग से किसानों की आय में वृद्धि तो होगी ही साथ ही खेतों में पराली जलाए जाने की समस्या से निदान होगा। इसके लिए इकाई स्थापना के लिए अनुदान दिया जाएगा। यह जानकारी डीएम अविनाश कुमार ने उप्र सरकार जैव नीति 2022 के तहत बैठक में दी।
जिलाधिकारी ने कहा कि कृषि और पशुधन अपशिष्ट के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन का विशेष योगदान है। वहीं, ठोस अपशिष्ट के साथ जैव अपशिष्ट का उपयोग करके बायो गैस प्लांट बायोकोल, बायोडीजल, बायो एथनॉल इकाइयों की स्थापना का काम भी शुरू कर दिया गया है। इसका पहला फायदा यह है कि कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी तो दूसरी ओर किसानों की आय बढ़ेगी। रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
उन्होंने बताया कि कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन संयंत्र के लिए 75 लाख रुपये प्रति टन की दर से, बायोकोल उत्पादन संयंत्रों के लिए 75 हजार रुपये प्रतिटन की दर से और बायोडीजल उत्पादन संयंत्रों के लिए 3 लाख रुपये प्रति किलोलीटर की दर से 20 करोड़ का अनुदान दिया जा रहा है। वहीं, सभी स्थापित संयंत्रों को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने की तिथि से 10 वर्ष तक विद्युत शुल्क में 100 प्रतिशत छूट, भूमि अधिग्रहण पर भी शत प्रतिशत छूट मिलेगी। बायो एनर्जी संयंत्रों की स्थापना के लिए ग्राम सभा की भूमि पर एक रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से 30 साल के लिए पट्टे पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए यूपीनेडा को नोडल एजेंसी नामित किया है। इस दौरान प्राप्त 10 आवेदनों पर चर्चा हुई।
आदित्य शर्मा वैद्यनाथ ग्रुप द्वारा चिरगांव के ग्राम लुहरघाट के पास नैपियर घास का उत्पादन कर बायोगैस/सीबीजी का प्लांट तैयार किए जाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। बैठक में सीडीओ जुनैद अहमद, उप कृषि निदेशक एमपी सिंह, पीओ नेडा वीरेंद्र कुमार जैन, एक्सईएन रमाकांत दीक्षित सहित एफपीओ के किसान मौजूद रहे।
05jjrp02- झज्जर। लघु सचिवालय में प्रदर्शन करती आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स। संवाद