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कुपोषण से लड़ने के लिए खानपान का रखें ख्याल

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aprajita 100 miliun smiles - फोटो : amarujala
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अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत शनिवार को ‘वर्तमान परिदृश्य में पोषण’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें समाज कार्य संकाय तथा राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम व सप्तम इकाई के छात्र - छात्राओं ने हिस्सा लिया।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के डा. बी आर अंबेडकर समाज कार्य संस्थान में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्राध्यापिका तथा वर्तमान में स्वास्थ्य सलाहकार के रूप में कार्यरत डॉ. नेहा गुप्ता ने कहा कि विश्व स्तर पर एक तिहाई से अधिक बच्चों की मृत्यु कुपोषण या उचित पोषण न मिलने के कारण होती है। कुपोषण एक साइलेंट किलर है। प्रत्येक व्यक्ति के भोजन में विविधता पूर्ण आवश्यक खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में मिलनी चाहिए।
एनएसएस के समन्वयक एवं हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुन्ना तिवारी ने छात्रों को सामाजिक संरचना में हो रहे बदलाव एवं उसके दुष्परिणाम समाज कार्य द्वारा उसमें सुधार की संभावना पर विचार प्रकट किए। पत्रकारिता संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. सीपी पैन्यूली के कहा कि प्रकृति हमें हर मौसम के लिहाज से भोज्य पदार्थ उपलब्ध कराती है, परंतु हम वर्तमान भौतिकवादी संस्कृति के वशीभूत होकर प्रकृति से दूर हो रहे हैं, जिससे कुपोषण की समस्या ज्यादा ही बढ़ रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो.देवेश निगम ने की।
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इस मौके पर समाज कार्य विभाग के छात्र-छात्राओं ने एक लघु नाटिका प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक अनूप कुमार, गुंजा चतुर्वेदी के साथ-साथ समाज कार्य संस्थान के सभी छात्र-छात्राएं एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई प्रथम एवं सप्तम के सभी स्वयंसेवक उपस्थित रहे। संचालन डॉ. यतींद्र मिश्रा व आभार डॉ. शिल्पा शर्मा ने व्यक्त द्वारा किया।

ऐसे रखें सेहत का ख्याल
डॉ. नेहा गुप्ता ने बताया कि इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने एक भारी काम करने वाले औसत भारतीय के लिए प्रतिदिन 2400 कैलोरी तथा कम शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति के लिए 2100 कैलोरी का मानक तय किया है, परंतु हमारे देश में व्याप्त आर्थिक असमानता तथा संसाधनों के असमान वितरण से मनुष्य के लिए आवश्यक सुपोषित भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का भोजन में अनाज, दाल, तेल, दूध, अंडे, सब्जियों और फलों से पूर्ण होना चाहिये।


सरकार की तरफ से कुपोषण को पूरी तरीके से दूर करने के लिए कई अभियान चलाकर लाभ पहुंचा रही है। लेकिन, अधिकांश लोग जानकारी के अभाव में योजना का लाभ नहीं ले पा रहे। - मेघा


उपचार के साथ-साथ परिजनों और चिकित्सकों को गर्भवती महिलाओं का ध्यान रखना चाहिए। तब जाकर कुपोषण से जंग लड़ी जा सकती है। ये सुनिश्चित होना चाहिए। - सविता


कुपोषण को लेकर हर तरीके से प्रयास किया जा रहा है। लेकिन, पूर्ण रूप से अब तक सफलता नहीं मिली है। इसको लेकर और जागरूक होना पड़ेगा। तभी कुपोषण का जड़ से खात्मा होगा। - रोहित सोनी


एनएसएस के शिविरार्थी कुपोषण को मिटाने के लिए लगातार मलिन बस्तियों प्रचार-प्रसार कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अब तक कई स्थानों पर अभियान चलाया जा चुका है। - मोहम्मद यूसुफ
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