ताज महल के सौंदर्य से जुडे़ विविध रूप एवं चित्रकारों की कल्पना के खूबसूरत आयाम देखने हों तो एक बार राजकीय संग्रहालय में लगी चित्र प्रदर्शनी में जरूर देखिए।
दुनिया के सात आश्चर्यों में एक मानव कृति ताज महल भले ही शाहजहां - मुमताज के प्रेम का प्रतीक हो, लेकिन अपने धवल संगमरमरी विशेषता से यह पूनम की रात में धरती का चांद है। शायद इसी खूबी को भांप कर देश - विदेश के चित्रकारों ने अपनी तूलिकाओं से ताज महल की प्रकृति एवं मुहब्बत के आवरण में छिपे कई रूपों को कागजों में उकेरा है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एसपी वर्मा द्वारा संग्रहित इन चित्रों में जहां ताजमहल का अक्स यमुना क ी जल धारा में दिखता है, वहीं महल की खिड़की से शाहजहां के अमर प्रेम ताज महल को निहारती खूबसूरत महिला लोगों को आकर्षित करती है। 18वीं शताब्दी के ताज महल को दर्शा रहे अधिकांश चित्रों में से एक में दक्षिण भारतीय मंदिर एवं ताज महल की सुंदरता को प्रतिद्वंद्वित किया गया है। वहीं ताजमहल के समीप यमुना में नौकायन, रेगिस्तान व ऊंटों का काफिला, हाथियों के झुंड सहित पूर्णिमा की रात में ताज महल के विविध रूप चित्रकारों ने चित्रित किए हैं। मकबरा कक्ष में सतरंगी नक्काशी एवं जीवन के अंतिम क्षण में ताजमहल की ओर निहारते बेबस मुगल बादशाह शाहजहां एवं घुड़सवारी करते युवा शाहजहां के अलावा दाराशिकोह से वार्ता करते मुगल बादशाह के चित्र देखने लायक हैं। उल्लेखनीय है कि यह अद्भुत चित्र कई देशों में प्रदर्शित किए जा चुके हैं।