दर्जी की हत्या कर शव फेंका था सतना में
झांसी। कोतवाली क्षेत्र निवासी दर्जी संजय जोशी के लापता होने का रहस्य उजागर हो गया है। पड़ोसी ने बेइज्जती का बदला लेने व विवाद के बाद भी पत्नी से बात करने से नाराज होकर दो लाख में भाड़े के हत्यारों से संजय की हत्या करवाई थी। योजना के तहत यूनिफार्म सिलवाने का ठेका दिलाने के बहाने बुलाकर भाड़े के हत्यारों ने उसका अपहरण कर लिया था। इसके बाद कार में ही गला दबाकर और सिर पर पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी थी। शव को सतना में फेंक दिया था। मोबाइल से कॉल ट्रेस होने पर पुलिस मुख्य आरोपी तक पहुंच गई। पुलिस ने हत्या में शामिल मुख्य आरोपी समेत छह को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से पिस्टल, कारतूस, हत्या में इस्तेमाल कार और बाइक बरामद की है।
पुलिस लाइन में शुक्रवार को एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि कोतवाली क्षेत्र के अंदर लक्ष्मी गेट निवासी दर्जी संजय जोशी 20 जून को यूनिफार्म की नाप लेने घर से निकले थे। इसके बाद से वे घर नहीं लौटे थे। पुलिस ने उनकी गुमशुदगी दर्ज कर ली थी। बाद में परिजन अनहोनी की आशंका जताते हुए अधिकारियों से मिले थे। इस पर गुमशुदगी को 25 जून को अपहरण के मुकदमे में तब्दील कर दिया गया था। सुराग लगाने के लिए अधिकारियों के नेतृत्व में स्वॉट टीम प्रभारी विजय कुमार पांडेय, नवाबाद प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र कुमार द्विवेदी, कोतवाल संजय सिंह समेत सर्विलॉस टीम को भी लगाया गया था। मोबाइल पर आई कॉल को ट्रेस करने के बाद महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस के हाथ लगी। इस पर 11 जुलाई को पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी ओमप्रकाश साहू को धर दबोचा।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह संजय जोशी के घर के पास रहता था। सुबह के समय दोनों परिवार के लोग घर के पास मंदिर में दर्शन करने आते थे। जहां करीब छह - सात महीने पहले मंदिर में विवाद के दौरान संजय ने ओमप्रकाश की बेइज्जती कर दी थी। जिसका बदला लेने की ठान ली थी। इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत बंद हो गई थी लेकिन, संजय जोशी व उसकी पत्नी मोबाइल पर बात करते थे और मंदिर में जाकर मिलते थे, जो उसे पसंद नहीं था। बेइज्जती का बदला और पत्नी से बातचीत पसंद न होने के कारण उसने हत्या की साजिश रची।
बताया गया कि आरोपी का साढू़ नरेंद्र साहू का भाई दीपक साहू अपराधी किस्म का है। जेल में बंद होने के दौरान उसकी दोस्ती ग्वालियर के थाना पुरानी छावनी स्थित जलालपुर निवासी गुरविंद सिंह उर्फ लकी से हुई थी। जेल से छूटने के बाद हत्या की साजिश बनी। इसकेे लिए दो लाख रुपये में बात तय हुई। मौके पर ही काके को पांच हजार रुपये एडवांस देने के साथ संजय जोशी का मोबाइल नंबर भी दिया। बाकी रकम काम के बाद देना तय हुई। इसके बाद थाना सीपरी बाजार स्थित ग्वालियर रोड निवासी सुरेंद्र सिंह उर्फ लकी, थाना प्रेमनगर के नगरा स्थित सकलेनाबाद निवासी राकेश जगत उर्फ रक्कू फौजी के साथ मिलकर अंजाम दिया। पुलिस ने हत्या में शामिल सभी आरोपियों को दबोच लिया। डीआईजी ने टीम को 25 हजार व एसएसपी ने 15 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है। इस दौरान एसपी देहात राहुल मिठास, एसपी सिटी श्रीप्रकाश द्विवेदी, सीओ सिटी जितेंद्र सिंह परिहार भी मौजूद रहे।
ऐसे बुलाया था संजय को
मृतक संजय के मोबाइल पर फोन कर एक इंजीनियरिंग कॉलेज की यूनिफार्म सिलवाने का ठेका देने के लिए इलाइट बुलाया गया। जहां गाड़ी में बैठाकर उसे कानपुर राजमार्ग की तरफ ले जाया गया। रास्ते में तौलिया से गला दबाने के साथ सिर पर पत्थर से प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया। मामला पुलिस की पकड़ में न आए, इसके लिए शव को सतना में फेंकने की साजिश मौके पर बनाई गई। सभी गाड़ी से उतर गए, जबकि अकेले चालक राकेश गाड़ी में शव रखकर सतना लेकर पहुंचा, जहां एक स्थान पर फेंककर आ गया।
ताज एक्सप्रेस से मिला था मोबाइल
आरोपियों ने पुलिस को चकमा देने की पूरी तैयारी कर रखी थी। इसके लिए शिवपुरी के थाना अमोला स्थित ममोनीकला निवासी संजीव राजपूत से दूसरे कागजात पर सिम ली। हत्या करने के बाद सुरेंद्र सिंह मोबाइल ट्रेन में रखने के लिए करारी स्टेशन पहुंचा। यहां खड़ी ताज एक्सप्रेस के डी - 1 कोच के शौचालय में मोबाइल रखकर भाग आया था। झांसी में सफाई के दौरान खड़ी ट्रेन से उक्त मोबाइल सफाईकर्मी ने उठा लिया था।
आधार कार्ड दिखाकर लिया बाकी पैसा
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सभी एकत्रित होकर ओमप्रकाश साहू के पास पहुंचे। जहां सुबूत के तौर पर मृतक का आधार कार्ड दिखाकर काम तमाम बात करने की बात कही। जहां बकाया 1 लाख 95 हजार रुपये की रकम लेकर आरोपी अपने - अपने घर चले गए थे।
एसटीएफ को थी जांच सौंपने की तैयारी
मामला गंभीर मानते हुए एसएसपी ने एसटीएफ से भी चर्चा कर ली थी। जल्द ही पूरी जांच एसटीएफ को देने की तैयारी थी। इस दौरान पुलिस टीमों ने सराहनीय पड़ताल कर आरोपियों को धर दबोचा। खुलासे पर डीजीपी ने अधिकारियों समेत टीम को बधाई दी है।
सतना पुलिस ने कर दिया था अंतिम संस्कार
सतना पुलिस ने भी लावारिस में कार्रवाई कर तीन दिन बाद अंतिम संस्कार करा दिया था। थाना पुलिस ने फोटो खींचकर अपने पास रख ली थी। मौके पर पहुंचने के बाद फोटो देखने के बाद भी पुलिस को पता चल सका था।
टीम में ये रहे शामिल
कोतवाली राजीव सिंह, सोमश कुमार, अजीत शर्मा, अभिनेश्वर तिवारी, कुंवर बहादुर, प्रवीण, दिव्या सोनकर, योगेंद्र चौहान, विलमेन्दर, शैलेंद्र, पद्म गोस्वामी, प्रदीप सेंगर, दुर्गेश चौहान, मनोज कुमार, रमेश द्विवेदी मौजूद रहे।