झांसी। फसल उत्पादकता बढ़ाने को देश में एक साथ नई स्वाइल टेस्टिंग प्रणाली आरंभ हुई लेकिन, पिछले करीब डेढ साल से सरकार ने इसके लिए कोई बजट ही जारी नहीं किया। इस वजह से किसान उपज के मुताबिक किसान मिट्टी की जांच नहीं करा पा रहे हैं।
आधुनिक दौर में कृषि के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। आने वाले समय में खाद एवं बीज को खेतों की मिट्टी के प्रकृति के मुताबिक इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई। देश भर में ग्रिड स्वाइल टेस्टिंग प्रणाली लागू की गई।
इसके तहत मिट्टी का परीक्षण करके किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड दिए गए। स्वाइल हेल्थ कार्ड के हिसाब से किसानों को उवर्रक एवं बीज भी सब्सिडी पर दिए गए। यहां के सभी ब्लॉकों में करीब पचास गांवों में इस योजना को पायलट योजना के तहत लागू किया गया। पहले साल करीब तीस लाख रुपये खर्च करने के बाद जब योजना को दूसरे चरण में ले जाया जाना था तभी अचानक सरकार ने कदम पीछे खींच लिए। उसने जरूरी बजट ही जारी नहीं किया। इस वजह से टेस्टिंग का काम पूरी तरह बंद हो गया। नए वित्तीय वर्ष में भी बजट के जारी होने की उम्मीद कम है। मृदा संरक्षण अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि पिछले वर्ष 160 ग्राम चयनित हुए। इनमें मृदा नमूना संग्रह नहीं हुआ। चयनित गांव में एक कृषक का ही प्रदर्शन हो सका। उन्होंने इस वर्ष बजट जारी होने की उम्मीद जताई है।
अत्याधुनिक मशीन का प्रोजेक्ट भी अटका
मिट्टी के परीक्षण के लिए झांसी में करीब सवा करोड़ की लागत से अत्याधुनिक आईसीपी-ओईएस मशीन स्थापित की जानी थी लेकिन, यह प्रस्ताव भी बजट के अभाव के चलते अटक गया। इसके लिए केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष प्रोजेक्ट मंगाया था लेकिन, उसके बाद मामला आगे ही नहीं बढ़ सका। मशीन स्थापित करने के लिए जगह भी तलाश ली गई थी। कृषि अधिकारियों का कहना है कि उक्त मशीन सबसे आधुनिक मशीन है। इसके माध्यम से रोजाना एक हजार से अधिक सैंपल टेस्ट किए जा सकते हैं। अभी मौजूदा परीक्षण का काम मैनुअल तरीके से होता है। इस वजह से टेस्टिंग रिपोर्ट भी काफी देर से आती है जबकि आईसीपी मशीन के जरिए आटोमैटिक तकनीक के से नमूनों का चंद मिनट में परीक्षण पूरा हो जाएगा। इस मशीन का भी बजट न होने की वजह से इंतजार ही हो रहा है।