झांसी। राष्ट्रव्यापी स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार झांसी प्रदेश में दूसरा साफ सुथरा शहर माना गया। जबकि देश में यह 68वें पायदान पर रहा। हालांकि यह रैकिंग प्रथम दो तिमाही की रिपोर्ट के आधार पर जारी हुई है। आखिरी रैकिंग जनवरी में सर्वे होने के बाद जारी होगी।
केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय हर साल पूरे देश में साफ-सुथरे शहरों की पड़ताल करता है। अप्रैल माह में सर्वेक्षण-2020 की शुरुआत हुई। अप्रैल-जून-जुलाई एवं सितंबर, अक्तूबर एवं दिसंबर की दो तिमाही में शहरों की स्वच्छता आंकी गई। प्रत्येक तिमाही के लिए 2000 अंक तय किए गए। झांसी को एक से दस लाख आबादी के शहरों में शामिल किया गया। स्वच्छता के विभिन्न 12 स्तरों पर सहुलियतों को परखने के बाद झांसी के खाते में पहली तिमाही के 1249.84 अंक जबकि दूसरी तिमाही में 998 अंक आए। कुछ अंकों के आधार पर झांसी को देशभर में 68वां स्थान हासिल हुआ हालांकि इसी श्रेणी में वह यूपी का दूसरा साफ सुथरा शहर माना गया।
पिछले वर्ष 2019 में भी झांसी 68वें स्थान पर रही जबकि 2018 में वह 60वें पायदान पर रही। नगर निगम प्रशासन पिछले साल भर से रैकिंग सुधार में जुटा रहा लेकिन, कचरा निस्तारण न कर सकने का खामियाजा भुगतना पड़ा। सबसे अधिक नुकसान वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के न होने से उठाना पड़ा। कचरा अभी डंपिंग ग्राउंड में खुले में डंप किया जा रहा। इसको लेकर एनजीटी भी कई बार फटकार लगा चुका। मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इसे भी असुरक्षित तरीके से नष्ट ही किया जाता है। कुछ वर्ष पूर्व पुणे की कंपनी पूर्णा प्रो इनवाइरो इंजीनियरिंग की मदद से एफएसएम प्लांट चलाया गया लेकिन, इसमें भी अधिक सफलता नहीं मिल सकी।
यह तिमाही की रिपोर्ट है। इसके आधार पर 25 फीसद अंक ही जुड़ेंगे। सबसे बड़ी चुनौती जनवरी में होने वाला सर्वे है। उसके लिए नगर निगम ने तैयारियां की हुई हैं। उम्मीद है आखिरी रिपोर्ट में हमारी रैंकिंग में सुधार होगा
अरुण कुमार गुप्ता
अपर नगर आयुक्त एवं स्वच्छता सर्वेक्षण प्रभारी
गले की हड्डी बनी प्रोसस प्लांट की मंजूरी
झांसी। कूड़े से बिजली बनाने के प्रस्ताव पर सदन में हुआ विवाद अब तूल पकड़ता दिखता है। सदन की कार्यवृत्ति में उक्त प्रस्ताव को स्वीकृत दर्शाया गया जिससे पार्षदों का एक धड़ा बिफर उठा। नाराज पार्षदों ने बुधवार को नगर आयुक्त को शिकायत पत्र लिखते हुए सदन की कार्रवाई की वीडियो रिकाडिंग उपलब्ध कराने की मांग की है।
पार्षद विकास खत्री, महेश गौतम, सुलेमान मंसूरी, कन्हैया कपूर, पुष्पेंद्र सिंह,जुगल किशोर अनीस अहमद, बालकिशन, सिद्घार्थ अहरिवार, कमर खातून, छोटे लाल, ममता, अजीदा समेत अन्य पार्षदों ने लिखित पत्र में इस रिकाडिंग को उपलब्ध कराने की मांग की है। अंसतुष्ट पार्षदों का आरोप है महापौर मनमाने तरीके से प्रस्ताव पास कराना चाहते हैं जबकि सदन में इसे मंजूरी नहीं दी। पार्षदों के तेवर से अब यह मामला निगम प्रशासन के गले की हड्डी बनता जा रहा है। पार्षद इस मामले की शिकायत मंडलायुक्त से करने की तैयारी में हैं।