यात्रियों के लिए ट्रेन में सफर करना दुश्वारियों से भरा हो गया है। शुक्रवार को मुंबई से गोरखपुर जाने वाली जनसाधारण एक्सप्रेस 41 घंटे देरी से चल रही थी। लखनऊ से इंटरसिटी एक्सप्रेस साढे़ छह घंटे देरी से आई और झांसी से सात घंटे देरी से रवाना हुई। ग्वालियर बरौनी मेल और साबरमती एक्सप्रेस के निरस्त होने से कानपुर की तरफ जाने वाले यात्री परेशान रहे।
ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्रियों का समय तो बर्बाद हो रही रहा है, उनका सुकून भी छिन रहा है। शुक्रवार को मुंबई से गोरखपुर जाने वाली 12598 जनसाधारण एक्सप्रेस 41 घंटे देरी से चल रही थी। ट्रेन को 21 जून की सुबह सात बजे आना था और 22 जून की देर रात तक ट्रेन झांसी नहीं आई थी। लखनऊ से रात 10.35 बजे झांसी आने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस सुबह 4.59 बजे आई। इस कारण यह ट्रेन झांसी से वापसी में सुबह 6.10 बजे की जगह दोपहर एक बजे रवाना हो सकी। ग्वालियर- बरौनी छपरा मेल और अहमदाबाद से वाराणसी जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस के निरस्त होने के कारण यात्री दोपहर बाद कानपुर की तरफ जाने के लिए परेशान रहे। कानपुर की तरफ जाने के लिए यात्री शाम 7.30 बजे जाने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस के इंतजार में बैठे रहे। कुशीनगर एक्सप्रेस के आने पर उसमें जनरल और स्लीपर कोचों में पैर रखने की जगह नहीं रही। इसी तरह 12 से अधिक ट्रेनें दो घंटे से अधिक देरी से आईं, जिससे यात्री परेशान रहे।